स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय (PIB), भारत सरकार — स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय · PIB Delhi · मूल विज्ञप्ति pib.gov.in पर पढ़ें
- संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा संस्थानों में गुणवत्ता मूल्यांकन और मानकों को सुदृढ़ करेंगे स्वायत्त बोर्ड
- एनसीएएचपी ने एक राष्ट्र, एक पाठ्यक्रम के तहत दक्षता-आधारित मेडिकल रेडियोलॉजी और इमेजिंग टेक्नोलॉजी डिप्लोमा पाठ्यक्रम अधिसूचित किया
- दो वर्षीय डी.एमआरआईटी कार्यक्रम में रेडियोलॉजी और इमेजिंग में छह माह की क्लीनिकल इंटर्नशिप शामिल होगी
- एनसीएएचपी ने संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा व्यवसायियों के लिए विशिष्ट पहचान संख्या और क्यूआर-कोड युक्त प्रमाण-पत्रों के साथ डिजिटल पंजीकरण की शुरुआत की
- राज्य और केंद्रीय रजिस्टरों के माध्यम से संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा व्यवसायियों का सार्वजनिक सत्यापन संभव होगा
भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा व्यवसाय आयोग (एनसीएएचपी) ने संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा शिक्षा तथा व्यावसायिक अभ्यास में मानकों को सुदृढ़ करने के लिए राष्ट्रीय संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा व्यवसाय आयोग अधिनियम, 2021 के तहत उपाय अधिसूचित किए हैं। इनमें स्वायत्त बोर्ड और केंद्रीय मूल्यांकन समिति (स्थापना, गठन, कार्य और शक्तियां) विनियम, 2026, मेडिकल रेडियोलॉजी और इमेजिंग टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा (डी.एमआरआईटी) के लिए दक्षता-आधारित पाठ्यक्रम तथा संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा व्यवसायियों के पंजीकरण संबंधी विनियम, 2026 शामिल हैं।
इन उपायों में संस्थानों के मूल्यांकन और गुणवत्ता आश्वासन, दक्षता-आधारित शिक्षा एवं प्रशिक्षण तथा संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा व्यवसायियों के पंजीकरण और सत्यापन के लिए एक सुव्यवस्थित प्रणाली का प्रावधान किया गया है।
स्वायत्त बोर्डों और केंद्रीय मूल्यांकन समिति के माध्यम से संस्थागत मानकों को सुदृढ़ करना
राष्ट्रीय संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा व्यवसाय आयोग (एनसीएएचपी) ने राष्ट्रीय संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा व्यवसाय आयोग अधिनियम, 2021 के तहत निम्नलिखित विनियम अधिसूचित किए हैं – (क) संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा व्यवसायियों के पंजीकरण संबंधी विनियम, 2026 (ख) स्वायत्त बोर्ड और केंद्रीय मूल्यांकन समिति (स्थापना, गठन, कार्य और शक्तियां) विनियम, 2026. इन विनियमों में मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रमों के लिए संस्थागत मूल्यांकन, गुणवत्ता आश्वासन और मानकों के कार्यान्वयन को सुदृढ़ करने हेतु एक रूपरेखा का प्रावधान किया गया है।
विनियमों की प्रमुख विशेषताएं
- इन विनियमों में राज्य संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा परिषदों के अंतर्गत स्वायत्त बोर्डों की स्थापना और उनके कार्यकरण का प्रावधान किया गया है, जिनके लिए शिक्षा, संस्थागत मूल्यांकन, व्यावसायिक नैतिकता और पंजीकरण से संबंधित जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं। स्वायत्त बोर्डों में एक अध्यक्ष सहित 10 से 20 सदस्य होंगे, जिनमें मान्यता प्राप्त संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा व्यवसायों की श्रेणियों का प्रतिनिधित्व होगा।
- स्नातक और स्नातकोत्तर बोर्ड मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रमों के लिए मानकों, दक्षता-आधारित रूपरेखाओं, संकाय विकास, प्रशिक्षण और अनुसंधान के कार्यान्वयन को सुगम बनाएंगे तथा राज्य परिषद के समक्ष रिपोर्ट और सिफारिशें प्रस्तुत करेंगे।
- मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड मान्यता और अनुमति पत्र के लिए आवेदनों का मूल्यांकन करेगा, संस्थानों का निरीक्षण करेगा, वार्षिक प्रकटीकरणों की समीक्षा करेगा, मूल्यांकनकर्ताओं का पैनल तैयार करेगा, संस्थानों का मूल्यांकन और रेटिंग करेगा तथा राज्य परिषद की वेबसाइट के माध्यम से मूल्यांकन और रेटिंग संबंधी जानकारी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कराएगा।
- नैतिकता और पंजीकरण बोर्ड व्यवसायियों के दस्तावेजों का सत्यापन करेगा और पंजीकरण के लिए सिफारिश करेगा। बोर्ड राज्य रजिस्टरों के रखरखाव तथा व्यावसायिक नैतिकता और आचरण संबंधी मानकों के कार्यान्वयन में सहयोग करेगा और शिकायतों तथा उल्लंघनों का मूल्यांकन करते हुए व्यावसायिक पंजीकरण से संबंधित सिफारिशें करेगा।
केंद्रीय मूल्यांकन समिति (सीएसी)
- जिन राज्यों में कार्यशील राज्य परिषद अस्तित्व में नहीं है, उन राज्यों के लिए इन विनियमों में एनसीएएचपी की समग्र निगरानी में और एनसीएएचपी सचिवालय की सहायता से केंद्रीय मूल्यांकन समिति (सीएसी) का प्रावधान किया गया है। सीएसी स्वायत्त बोर्डों के कार्यों का निर्वहन करेगी तथा निर्धारित सत्यापन, निरीक्षण और रेटिंग प्रक्रियाओं का पालन करेगी।
- सीएसी में एक अध्यक्ष सहित 10 से 30 सदस्य होंगे, जिनमें व्यावसायिक श्रेणियों का प्रतिनिधित्व होगा तथा आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त प्रतिनिधित्व भी सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके, विशेष रूप से उन क्षेत्रों का, जहां कार्यशील राज्य परिषदें नहीं हैं।
- विनियमों में सीएसी के सदस्यों को हटाने के आधार और उचित प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है, जिसमें हितों का टकराव, आचार संहिता का उल्लंघन, पद का दुरुपयोग और अन्य निर्दिष्ट परिस्थितियां शामिल हैं तथा संबंधित सदस्य को सुनवाई का अवसर प्रदान किया जाएगा।
मानकीकृत और गुणवत्तापरक संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा शिक्षा की दिशा में
- एनसीएएचपी ने इससे पहले संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा व्यवसायियों के पंजीकरण संबंधी विनियम, 2026 अधिसूचित किए थे, जिनके तहत संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा व्यवसायियों को अधिनियम के अंतर्गत पंजीकरण कराने और अपने व्यवसाय का अभ्यास करने में सक्षम बनाया गया है। इन विनियमों की अधिसूचना से केंद्रीय और राज्य रजिस्टरों में एक निर्बाध और पारदर्शी पंजीकरण प्रक्रिया सुनिश्चित होती है।
- स्पष्ट रूप से परिभाषित संस्थागत मूल्यांकन, निरीक्षण और रेटिंग तंत्र के साथ-साथ शिक्षा, नैतिकता और पंजीकरण के लिए निर्धारित कार्यों की स्थापना के माध्यम से, इन विनियमों में संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में शिक्षा की गुणवत्ता तथा व्यावसायिक मानकों में सुधार के लिए एक सुव्यवस्थित ढांचे का प्रावधान किया गया है।
प्रशिक्षित इमेजिंग व्यवसायियों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए दक्षता-आधारित शिक्षा
शिक्षा और प्रशिक्षण को मानकीकृत करने के उद्देश्य से, एनसीएएचपी ने 30 सितंबर 2026 को संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए एक राष्ट्र, एक पाठ्यक्रम के तहत मेडिकल रेडियोलॉजी और इमेजिंग टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा (डी.एमआरआईटी) के लिए दक्षता-आधारित पाठ्यक्रम अधिसूचित किया है।
डी.एमआरआईटी पाठ्यक्रम संचालित करने वाले या इसे संचालित करने के इच्छुक संस्थानों के लिए शैक्षणिक वर्ष 2027–28 से इस पाठ्यक्रम को अनिवार्य रूप से अपनाना होगा। इसे लागू करने के इच्छुक संस्थान शैक्षणिक वर्ष 2026–27 से भी इस पाठ्यक्रम को अपना सकते हैं।
डिप्लोमा कार्यक्रम को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी), अस्पतालों, निदान केंद्रों और अन्य स्वास्थ्य सेवा संस्थानों में मेडिकल रेडियोलॉजी और इमेजिंग सेवाओं के लिए प्रशिक्षित व्यवसायियों की बढ़ती आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। रेडियोलॉजी और इमेजिंग के क्षेत्र में उपयुक्त डिप्लोमा-स्तरीय कार्यक्रम के लिए छात्रों और हितधारकों की ओर से भी मांग की गई है।
डी.एमआरआईटी दो वर्षीय कार्यक्रम है, जो मान्यता प्राप्त बोर्ड या समकक्ष से भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान (पीसीबी) के साथ विज्ञान विषय में कक्षा 12 उत्तीर्ण करने वाले छात्रों के लिए है। यह पाठ्यक्रम पारंपरिक, ज्ञान-केंद्रित शिक्षा से दक्षता-आधारित दृष्टिकोण की ओर बदलाव को दर्शाता है, जिसमें मेडिकल रेडियोलॉजी और इमेजिंग सेवाओं में सुरक्षित, प्रभावी और नैतिक कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक ज्ञान, कौशल, मूल्यों और अभिवृत्तियों के अर्जन पर जोर दिया गया है।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण घटक छह माह की इंटर्नशिप है, जिसे छात्रों को व्यवस्थित व्यावहारिक क्लीनिकल अनुभव प्रदान करने और वास्तविक स्वास्थ्य सेवा परिवेश में सैद्धांतिक ज्ञान को लागू करने के अवसर देने के लिए तैयार किया गया है। इंटर्नशिप से उचित पर्यवेक्षण के तहत व्यावहारिक कौशल, व्यावसायिक दक्षताओं का विकास होगा और रोगी देखभाल संबंधी कार्यप्रणालियों, विकिरण सुरक्षा संबंधी कार्यप्रणालियों तथा इमेजिंग प्रक्रियाओं और उपकरणों से परिचित होने का अवसर प्राप्त होगा।
पाठ्यक्रम यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया गया है कि कार्यक्रम पूरा करने वाले व्यवसायी मेडिकल रेडियोलॉजी और इमेजिंग के क्षेत्र में कार्य करने तथा एक्स-रे, सीटी स्कैन, सोनोग्राफी, मैमोग्राफी और फ्लोरोस्कोपी जैसी नैदानिक सेवाओं में प्रभावी रूप से योगदान देने के लिए आवश्यक सैद्धांतिक ज्ञान, व्यावहारिक कौशल और व्यावसायिक दक्षताएं अर्जित करें, साथ ही रोगी सुरक्षा, विकिरण संरक्षण, गुणवत्ता आश्वासन और व्यावसायिक कार्यप्रणाली के निर्धारित मानकों का पालन करें।
डिप्लोमा कार्यक्रम की अधिसूचना इस विषय में उच्च स्तर की शिक्षा के लिए आयोग द्वारा पहले से स्थापित दक्षता-आधारित शिक्षा रूपरेखा का पूरक है। बैचलर ऑफ मेडिकल रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग टेक्नोलॉजी (बी.एमआरआईटी) और मास्टर ऑफ मेडिकल रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग टेक्नोलॉजी (एम.एमआरआईटी) के दक्षता-आधारित पाठ्यक्रम आयोग द्वारा 24 अप्रैल 2025 की अधिसूचना के माध्यम से पहले ही जारी किए जा चुके हैं, जिन्हें शैक्षणिक वर्ष 2026–27 से लागू किया जाना है।
मौजूदा स्नातक और स्नातकोत्तर कार्यक्रमों के साथ डी.एमआरआईटी पाठ्यक्रम की शुरुआत मेडिकल रेडियोलॉजी और इमेजिंग टेक्नोलॉजी में एक सुव्यवस्थित शैक्षिक मार्ग प्रदान करती है और इसका उद्देश्य उचित रूप से प्रशिक्षित व्यवसायियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहायता करना है, साथ ही देश भर में संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा शिक्षा में एकरूपता, मानकीकरण और गुणवत्ता को बढ़ावा देना है।
आयोग ने अब तक विभिन्न संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा व्यवसायों के लिए 20 दक्षता-आधारित पाठ्यक्रम जारी किए हैं। इन पाठ्यक्रमों को दक्षता-आधारित शिक्षा को सुदृढ़ करने, प्रशिक्षण को मानकीकृत करने और यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है कि छात्र समकालीन स्वास्थ्य सेवा प्रदायगी के लिए आवश्यक ज्ञान, कौशल और व्यावसायिक गुण अर्जित करें।
व्यवसायियों की पारदर्शिता और सत्यापन को सुदृढ़ करने के लिए पंजीकरण की रूपरेखा
एनसीएएचपी द्वारा अधिसूचित और 15 सितंबर 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा व्यवसायियों के पंजीकरण संबंधी विनियम, 2026, ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से विशिष्ट पहचान (यूआईडी) संख्या वाले पंजीकरण प्रमाण-पत्र जारी करने के साथ-साथ राज्य रजिस्टरों और केंद्रीय रजिस्टर, दोनों में संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा व्यवसायियों के पंजीकरण के लिए एक व्यापक ढांचा स्थापित करते हैं।
किसी व्यक्ति को विनियमों के अनुसार पंजीकरण प्राप्त करने के बाद ही मान्यता प्राप्त संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा व्यवसाय में अभ्यास करने का अधिकार होगा। पात्रता के लिए मान्यता प्राप्त प्राथमिक योग्यता होना आवश्यक है। ऐसे राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में रहने वाले व्यवसायी, जहां अभी तक कार्यशील राज्य परिषद की स्थापना नहीं हुई है, सीधे केंद्रीय रजिस्टर में पंजीकरण करा सकते हैं।
पंजीकरण पांच वर्षों तक वैध रहेगा और अनुमोदित ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से सतत् व्यावसायिक विकास (सीपीडी) संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद इसका नवीनीकरण किया जा सकेगा।
इन विनियमों में एकीकृत ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से राज्य रजिस्टरों और केंद्रीय रजिस्टर के बीच रिअल-टाइम समक्रमण का प्रावधान किया गया है। केंद्रीय और राज्य रजिस्टर आयोग तथा संबंधित राज्य परिषदों की वेबसाइटों के माध्यम से जनता के लिए उपलब्ध होंगे, जिनमें पंजीकृत व्यवसायियों का निर्धारित विवरण प्रदर्शित किया जाएगा और पंजीकरण की स्थिति के सत्यापन की सुविधा उपलब्ध होगी।
प्रत्येक पंजीकृत व्यवसायी को केंद्रीकृत प्रणाली के माध्यम से विशिष्ट पहचान (यूआईडी) संख्या जारी की जाएगी। पंजीकरण प्रमाण-पत्र, जिनमें यूआईडी और सुरक्षित क्यूआर कोड वाले डिजिटल प्रमाण-पत्र भी शामिल हैं, आयोग या संबंधित राज्य परिषद द्वारा जारी किए जाएंगे, जिससे पंजीकृत व्यवसायियों की पहचान और सत्यापन में सुविधा होगी।
इन विनियमों में मान्यता प्राप्त संस्थानों में नामांकित उन छात्रों के लिए अंतरिम पंजीकरण का भी प्रावधान किया गया है, जो संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा संबंधी योग्यता पूरी करने के लिए आवश्यक इंटर्नशिप, क्लीनिकल प्रशिक्षण, ऑब्ज़र्वरशिप या व्यावहारिक पाठ्यक्रम-कार्य कर रहे हैं। अंतरिम पंजीकरण की प्रक्रिया मान्यता प्राप्त संस्थान द्वारा शुरू की जानी होगी और संबंधित राज्य परिषद से अंतरिम पंजीकरण प्राप्त करना होगा। अंतरिम पंजीकरण के लिए आवेदन पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
इन विनियमों में संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में विदेशी योग्यता रखने वाले भारतीय नागरिकों के लिए पंजीकरण का प्रावधान किया गया है। विदेशी योग्यता प्राप्त संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा व्यवसायी पंजीकरण के लिए आवेदन करने के पात्र होंगे, यदि उनकी योग्यता आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त है या निर्धारित प्रमाण-पत्र समतुल्यता मूल्यांकन पूरा कर लिया गया है तथा, जहां लागू हो, संबंधित निकास परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली गई है। पात्र विदेशी योग्यता प्राप्त भारतीय व्यवसायियों के लिए विशिष्ट और निर्धारित अवधि वाले उद्देश्यों, जिनमें स्नातकोत्तर या विशेषज्ञता शिक्षा, फेलोशिप, क्लीनिकल अनुसंधान, ऑब्जर्वरशिप, उन्नत कार्यशालाएं, विशेषज्ञों के दौरे और स्वैच्छिक सामुदायिक सेवा शामिल हैं, के लिए अस्थायी पंजीकरण का भी प्रावधान किया गया है।
इन विनियमों में प्रायोजित विदेशी व्यवसायियों के लिए विशिष्ट और निर्धारित अवधि वाले उद्देश्यों के लिए अस्थायी पंजीकरण की अनुमति दी गई है। इनमें भारत के बाहर शिक्षा प्राप्त करने, व्यावसायिक गतिविधियां करने या छात्र विनिमय कार्यक्रमों में भाग लेने वाले पंजीकृत संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा व्यवसायियों के लिए गुड स्टैंडिंग प्रमाण-पत्र जारी करने का भी प्रावधान किया गया है।
आयोग वर्तमान में संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कार्यरत ऐसे व्यवसायियों के लिए अस्थायी पंजीकरण शुरू करने के प्रयास कर रहा है, जिनके पास निर्धारित प्राथमिक योग्यताएं नहीं हैं। ऐसे व्यवसायियों को नियमित पंजीकरण के लिए पात्रता प्राप्त करने हेतु ब्रिज कोर्स करने का विकल्प दिया जाएगा।
पंजीकरण और शुल्क का भुगतान ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा, जिससे संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा कार्यबल के पंजीकरण की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और अधिक पारदर्शी होगी।
समग्र रूप से, ये उपाय संस्थागत मूल्यांकन, दक्षता-आधारित प्रशिक्षण तथा व्यवसायियों के पारदर्शी पंजीकरण और सत्यापन की प्रणाली के माध्यम से संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा शिक्षा तथा व्यावसायिक कार्यप्रणाली में मानकों को सुदृढ़ करते हैं।
इस ढांचे का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रशिक्षण को बढ़ावा देना तथा रोगियों और सेवा उपयोगकर्ताओं को संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा व्यवसायियों के पंजीकरण का सत्यापन करने में सक्षम बनाना है।
यह पत्र सूचना कार्यालय (PIB) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति है, जिसे बिना बदलाव के प्रकाशित किया गया है।
