स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय (PIB), भारत सरकार — पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय · PIB Delhi · मूल विज्ञप्ति pib.gov.in पर पढ़ें
- इसका उद्देश्य मध्य भारत में चिड़ियाघर की देखरेख करने वालों और चिडि़याघर के प्रबंधन के बीच एक समान कल्याण मानकों को लागू करना और उनके बीच तालमेल को बेहतर बनाना है
मध्य भारत के चिड़ियाघरों की देखरेख करने वालों के लिए तीन दिन का क्षेत्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आज भोपाल के भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (आईआईएफएम) में शुरू हुआ। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) और आईआईएफएम द्वारा से 7 से 9 अक्टूबर, 2026 तक आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य चिड़ियाघर में रखे गए जानवरों की देखभाल, उनके व्यवहार, सुविधाओं के संचालन और संरक्षण से जुड़ी शिक्षा के मामलों में चिड़ियाघरों की देखरेख करने वालों की पेशेवर क्षमताओं को बढ़ाना है।
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के कार्यों में से एक काम चिड़ियाघर के कर्मियों के प्रशिक्षण का समन्वय करना है। चिड़ियाघर के रखवाले प्राणी उद्यान के कामकाज की रीढ़ हैं और वे सीधे तौर पर जानवरों की रोज़ाना की देखभाल करते हैं, यह मानते हुए इस क्षेत्रीय पहल में भोपाल के वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में तकनीकी कक्षा सत्र (क्लासरूम सेशन) और मौके पर जाकर सीखने का अनुभव (फ़ील्ड विज़िट), दोनों तरह का प्रशिक्षण दिया जाता है।
आईआईएफएम के निदेशक डॉ. के. रविचंद्रन ने अपने उद्घाटन भाषण में चिड़ियाघर के रखवालों को चिड़ियाघर के दैनिक कामकाज का मुख्य आधार बताया। उन्होंने कहा कि चिड़ियाघर के प्रबंधन की सफलता असल में उनकी मेहनत और लगन पर ही निर्भर करती है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि चिड़ियाघर के रखवालों को व्यवस्थित तकनीकी प्रशिक्षण और सुरक्षा प्रोटोकॉल की जानकारी देने से कामकाज की कुल क्षमता बढ़ती है, काम के दौरान होने वाले जोखिम कम होते हैं और संरक्षण से जुड़ी शिक्षा में चिड़ियाघरों की भूमिका बढ़ती है।
सत्र को संबोधित करते हुए, सीजेडए के सदस्य सचिव डॉ. वी. क्लेमेंट बेन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि चिड़ियाघर प्रबंधन में जानवरों की देखभाल करने वाले (कीपर्स) सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि उनकी रोज़ाना की निगरानी से ही जानवरों की सेहत और उनके कल्याण के बारे में सबसे पहले पता चलता है। चिड़ियाघर में जानवरों की देखभाल के आधुनिक तरीकों के लिए लगातार सीखते रहने, सुरक्षा के कड़े नियमों का पालन करने और रिकॉर्ड को सही तरीके से रखने की आवश्यकता होती है। उन्होंने कीपर्स से कहा कि वे सुरक्षा को अपनी दैनिक आदत बनाएं और पशु चिकित्सकों तथा प्रबंधकों के साथ मिलकर काम करें। डॉ बेन ने उन्हें याद दिलाया कि उनके रोज़ के काम का सीधा असर जानवरों के कल्याण, संचालन संबंधी सुरक्षा और संरक्षण के परिणामों पर पड़ता है।
इस पहल का उद्देश्य मध्य भारत के चिड़ियाघरों में कल्याण के एक समान मानक स्थापित करना और चिडि़याघर की देखरेख करने वालों तथा चिड़ियाघर प्रबंधन के बीच बेहतर तालमेल कायम करना है।
यह पत्र सूचना कार्यालय (PIB) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति है, जिसे बिना बदलाव के प्रकाशित किया गया है।
