लाइव रविवार, 04 अक्टूबर 2026
ब्रेकिंग
• [गुजरात] गुजरात एनईईटी-पीजी 2026 काउंसलिंग राउंड 1 पंजीकरण ACPPGMEC में शुरू हुआ • [गुजरात] गारो हिल्स से गुजरात तक: मेघालय मंडी ऐप पूरे भारत में 13 मीट्रिक टन अनानास ले जाता है • [गुजरात] ससुर के दबाव के बाद अहमदाबाद की महिला ने छोड़ा घर... • [गुजरात] साबरमती आश्रम का पुनरुद्धार: पेरिस की कंपनी गांधी के ऐतिहासिक अहमदाबाद स्थित घर में 23 संग्रहालय बनाएगी • [गुजरात] कर्मयोगी रैंकिंग में हरियाणा ने मारी बाजी, श्रेणी-बी में हासिल किया पहला स्थान; पंजाब-गुजरात को भी छोड़ा पीछे – haryana wins karmayogi rankings secures first place in category b surpasses punjab and gujarat • [गुजरात] अहमदाबाद एएमसी ने मेट्रो स्टेशनों के पास 6,149 वाहन पार्किंग के लिए नौ भूखंडों की पहचान की है
देश

सरकार ने विशेष न्यायालयों, पीड़ित सहायता, जागरूकता और शिकायत निवारण तंत्रों के माध्यम से नागरिक संरक्षण अधिनियम और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियमों के कार्यान्वयन को मजबूत किया है

पीसीआर और पीओए अधिनियमों के कार्यान्वयन के लिए तीन वित्तीय वर्षों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 1,423.30 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की गई
India News
Editorial photograph
ADVERTISEMENT

स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय (PIB), भारत सरकार — सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय · PIB Delhi · मूल विज्ञप्ति pib.gov.in पर पढ़ें

  • पीसीआर और पीओए अधिनियमों के कार्यान्वयन के लिए तीन वित्तीय वर्षों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 1,423.30 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की गई

केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रभावी कार्यान्वयन में निरंतर सहयोग प्रदान करती है। इसके लिए प्रवर्तन तंत्र को मजबूत करने, त्वरित सुनवाई को सुगम बनाने, पीड़ितों को राहत और पुनर्वास प्रदान करने, वैधानिक सुरक्षा उपायों के बारे में जागरूकता पैदा करने और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई उपाय किए गए हैं।

इन दोनों अधिनियमों के कार्यान्वयन की मुख्य जिम्मेदारी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों पर है। भारत सरकार, 1955 के नागरिक संरक्षण अधिनियम और 1989 के अनुसूचित जाति‍/अनुसूचित जनजाति (अत्‍याचार निवारण) अधिनियम के कार्यान्वयन हेतु केंद्रीय प्रायोजित योजना के माध्यम से, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अधिनियमों और नियमों के अंतर्गत संस्थागत और कार्यान्वयन तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

त्वरित सुनवाई के लिए अनन्य विशेष न्यायालयों को मजबूत बनाना

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत अपराधों के मुकदमे के लिए 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 217 अनन्य विशेष न्यायालय स्थापित किए गए हैं। यह अधिनियम संबंधित उच्‍च न्‍यायालय के मुख्‍य न्‍यायधीश के स‍हमति से उन जिलों में सत्र न्यायालयों को विशेष न्यायालय के रूप में नामित करने का भी प्रावधान करता है जहां मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम है।

अनन्य विशेष न्यायालयों की स्थापना और उन्हें मजबूत बनाने का उद्देश्य अधिनियम के तहत मामलों की त्वरित सुनवाई और प्रभावी निपटान को सुविधाजनक बनाना और यह सुनिश्चित करना है कि पीड़ितों की विशेष न्यायिक तंत्र तक पहुंच प्राप्त हो।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्रीय सहायता

केंद्र प्रायोजित योजना के तहत, केंद्र ने 2022-23 में 392.71 करोड़ रुपये, 2023-24 में 535.30 करोड़ रुपये और 2024-25 में 495.29 करोड़ रुपये जारी किए हैं और तीन वित्तीय वर्षों में यह राशि कुल मिलाकर 1,423.30 करोड़ रुपये की है।

यह योजना अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति संरक्षण प्रकोष्ठों और विशेष पुलिस स्टेशनों को मजबूत करने, न्यायिक तंत्र को मजबूत करने, पीड़ितों को राहत और पुनर्वास प्रदान करने, अंतरजातीय विवाहों को प्रोत्साहन देने, जागरूकता पैदा करने और अधिनियमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए अन्य उपायों के लिए सहायता प्रदान करती है।

इस योजना के तहत इन तीन वर्षों की अवधि में, क्रमशः 88,172, 79,667 और 99,216 पीड़ितों को राहत प्राप्त होने की सूचना मिली थी।

कानूनी सुरक्षा उपायों के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देना

सरकार ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 और उसके तहत बनाए गए नियमों के अंतर्गत उपलब्ध कानूनी सुरक्षा उपायों और अधिकारों के बारे में व्यापक जागरूकता पैदा करने को प्राथमिकता दी है।

केंद्र प्रायोजित योजना के तहत, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अधिनियमों और नियमों के प्रावधानों के बारे में जानकारी प्रसारित करने के लिए जागरूकता अभियान, कार्यशालाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम, जागरूकता शिविर और अन्य पहुंच संबंधी गतिविधियों को संचालित करने में सहायता प्रदान की जाती है।

संबल – शिकायत निवारण तक पहुंच को मजबूत बनाना

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने शिकायत निवारण तंत्रों तक आसान पहुंच बनाने के लिए, दिसंबर 2021 में अत्याचार विरोधी राष्ट्रीय हेल्पलाइन (एनएचएए) शुरू की, जिसका नाम बाद में बदलकर संबल कर दिया गया। इस पहल के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम से संबंधित शिकायतों को दर्ज कराने और उन पर नज़र रखने के लिए एक सुलभ तंत्र उपलब्ध कराया गया है। यह हेल्पलाइन टोल-फ्री नंबर 1800-202-1989 और शॉर्ट कोड 14566 के माध्यम से उपलब्ध है।

अंतरजातीय विवाहों के माध्यम से सामाजिक एकता को प्रोत्साहन देना

सामाजिक एकीकरण, समानता और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए सरकार के प्रयासों के तहत, अंतरजातीय विवाहों के लिए केंद्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जहां पति-पत्नी में से एक अनुसूचित जाति से संबंधित हो।

अंतरजातीय विवाहों के लिए प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने वाले दंपतियों की संख्या 2022-23 में 14,225 से बढ़कर 2024-25 में 26,050 हो गई।

स्रोत दस्तावेज़ में दिए गए भारत में अपराध से संबंधित नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 2024 में इस अधिनियम के तहत 65,646 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2023 में यह संख्या 70,725 और 2022 में 67,633 थी। वर्ष 2024 के अंत तक, 3,92,006 मामले विचाराधीन थे। ये आंकड़े समय पर जांच, प्रभावी अभियोजन और पीड़ितों को त्वरित सहायता प्रदान करने की निरंतर आवश्यकता को दर्शातें हैं।

सरकार अधिनियम के कार्यान्वयन को मजबूत करने और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के लिए न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

यह पत्र सूचना कार्यालय (PIB) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति है, जिसे बिना बदलाव के प्रकाशित किया गया है।

ADVERTISEMENT
स्रोत

यह पत्र सूचना कार्यालय (PIB), भारत सरकार द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति है — सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, PIB Delhi. PIB की कॉपीराइट नीति के अनुसार इसे बिना बदलाव के प्रकाशित किया गया है।

मूल विज्ञप्ति देखें
यह ख़बर साझा करें और हमारे सोशल मीडिया से जुड़ें:
ADVERTISEMENT