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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘तीसरे सागरमंथन संवाद’ के लिए भेजे गए अपने संदेश में नियमों पर आधारित समुद्री व्यवस्था का आह्वान किया

प्रधानमंत्री ने इस ‘थॉट लीडरशिप कॉन्फ्रेंस’ में वैश्विक नेताओं का स्वागत किया और बंदरगाहों के विकास तथा नए समुद्री कानूनों का उल्लेख किया
PM Narendra Modi calls for Rules-Based Maritime Order in Message to 3rd Sagarmanthan Dialogue
Photo: PIB

स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय (PIB), भारत सरकार — पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय · PIB Delhi · मूल विज्ञप्ति pib.gov.in पर पढ़ें

  • प्रधानमंत्री ने इस ‘थॉट लीडरशिप कॉन्फ्रेंस’ में वैश्विक नेताओं का स्वागत किया और बंदरगाहों के विकास तथा नए समुद्री कानूनों का उल्लेख किया
  • भारत का समुद्र संबंधी विजन विभिन्न क्षेत्रों एवं महासागरों तक फैला है और यह सहयोग, विश्वास, आपसी सम्मान व लाभ पर आधारित है: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को ‘सागरमंथन: द ग्रेट ओशन्स डायलॉग’ के तीसरे संस्करण में दुनिया भर के नीति-निर्माताओं, समुद्री क्षेत्र से जुड़ी अग्रणी हस्तियों और विशेषज्ञों का स्वागत किया। उन्होंने एक ऐसी “मुक्त, खुली, सुरक्षित और नियमों पर आधारित समुद्री व्यवस्था” का आह्वान किया जो सभी देशों के लिए शांति एवं समृद्धि लाए।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस सम्मेलन के लिए भेजे गए एक लिखित संदेश में कहा, “हमारा विजन एक ऐसी मुक्त, खुली, सुरक्षित और नियमों पर आधारित समुद्री व्यवस्था का है, जो सभी के लिए व्यापक शांति, समृद्धि और प्रगति लाए। मुझे विश्वास है कि ‘सागरमंथन’ इस व्यापक विजन को और मजबूती देगा।” यह सम्मेलन नई दिल्ली में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (एमओपीएसडब्ल्यू) और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) द्वारा आयोजित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया के एक हिस्से में होने वाली घटनाओं का प्रभाव दूर-दराज के क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है। इसलिए, महासागरों को लेकर वैश्विक स्तर पर संवाद एवं सहयोग पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। श्री मोदी ने कहा कि ‘सागरमंथन’ नाम का भारतीय परंपरा में विशेष महत्व है, क्योंकि मंथन का संबंध नई संभावनाओं की खोज से है। उन्होंने कहा कि महासागरों में दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं, लोगों और धरती के लिए “अपार संभावनाएं” छिपी हैं।

प्रधानमंत्री ने लिखा, “समुद्र के साथ भारत का संबंध जिम्मेदारी का भी है। अब हम जहां एक सशक्त समुद्री अर्थव्यवस्था बना रहे हैं, वहीं हम अपने महासागरों व तटीय इकोसिस्टम की सेहत की रक्षा भी कर रहे हैं। भारत का समुद्र संबंधी विजन विभिन्न क्षेत्रों एवं महासागरों तक फैला है और यह सहयोग, विश्वास, आपसी सम्मान व लाभ पर आधारित है। हमारा मानना ​​है कि महासागर साझा समृद्धि का जरिया बनने चाहिए, जहां हर देश का प्रतिनिधित्व हो और उसे प्रगति का अवसर मिले।”

श्री मोदी ने प्राचीन बंदरगाह शहर लोथल से लेकर चोल राजवंश तथा मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज की नौसेना से जुड़ी सोच सहित भारत के समुद्री इतिहास का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत के नाविक एवं व्यापारी दूर-दराज के क्षेत्रों तक सामान, विचार, कहानियां और संस्कृति लेकर गए। प्रधानमंत्री मोदी ने देश की समुद्री महत्वाकांक्षाओं को ‘विकसित भारत’ से जोड़ा, जोकि 2047 तक भारत को एक विकसित देश बनाने का सरकार का लक्ष्य है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत के प्रमुख बंदरगाहों ने अपनी क्षमता लगभग दोगुनी कर ली है, जबकि टर्नअराउंड समय में काफी कमी आई है। उन्होंने कहा, “भारत समुद्र को एक नए उद्देश्य के साथ देख रहा है। वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ की दिशा में आगे बढ़ने की यात्रा दरअसल समुद्री मामलों में एक सशक्त एवं अपेक्षाकृत अधिक सक्षम भारत के निर्माण की भी यात्रा है। हम जहाज बनाने और हरित नौवहन के नए दौर की तैयारी कर रहे हैं। हमारे प्रमुख बंदरगाहों ने अपनी क्षमता लगभग दोगुनी कर ली है, जबकि टर्नअराउंड समय में काफी कमी आई है।”

सरकार देश के समुद्रों को बेहतर ढंग से समझने और उनका जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने के लिए समुद्र विज्ञान और अन्वेषण में भी निवेश कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “भारत इस सेक्टर के लिए एक आधुनिक ढांचा बनाने के उद्देश्य से नई पीढ़ी के समुद्री कानून भी लेकर आया है। साथ ही, हम समुद्र विज्ञान और अन्वेषण में भी निवेश कर रहे हैं ताकि हम अपने समुद्रों को बेहतर ढंग से समझ सकें और उनकी अपार संभावनाओं का जिम्मेदारीपूर्वक सदुपयोग कर सकें।”

श्री मोदी ने कहा कि भारतीय नाविक अब दुनिया में समुद्री क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी श्रमशक्ति बन गए हैं और युवा भारतीय दुनिया भर के महासागरों में सम्मान अर्जित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत एक सशक्त समुद्री अर्थव्यवस्था बनाते हुए महासागरों की सेहत और तटीय इकोसिस्टम की रक्षा कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का समुद्र संबंधी विजन सहयोग, विश्वास, आपसी सम्मान व लाभ पर आधारित है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हमारा मानना ​​है कि महासागरों को साझा समृद्धि का स्रोत बनना चाहिए, जहां हर देश की अपनी आवाज हो और उसे आगे बढ़ने का अवसर मिले।“ उन्होंने विश्वास जताया कि ‘सागरमंथन’ इस सोच को मजबूत करेगा और आशा व्यक्त की कि इस संवाद से नए विचार सामने आयेंगे, गहरी साझेदारियां बनेंगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए नए अवसर सृजित होंगे।

यह पत्र सूचना कार्यालय (PIB) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति है, जिसे बिना बदलाव के प्रकाशित किया गया है।

स्रोत

यह पत्र सूचना कार्यालय (PIB), भारत सरकार द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति है — पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय, PIB Delhi. PIB की कॉपीराइट नीति के अनुसार इसे बिना बदलाव के प्रकाशित किया गया है।

मूल विज्ञप्ति देखें
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