स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी), भारत सरकार — शिक्षा मंत्रालय · पीआईबी शिमला · मूल विज्ञप्ति pib.gov.in पर पढ़ें
- आईआईएएस में विशेष व्याख्यान आयोजित
शिमला, 2 अक्टूबर, 2026। भारतीय उन्नत अध्ययन संस्थान (आईआईएएस), राष्ट्रपति निवास, शिमला ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती मनाने के लिए आज एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर, संस्थान के अध्येताओं, विद्वानों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने महात्मा गांधी के जीवन, विचारों और उनके द्वारा अपनाए गए सत्य और अहिंसा के आदर्शों को याद किया।
कार्यक्रम की शुरुआत महात्मा गांधी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। इसके बाद संस्थान परिवार की सदस्य कुमारी अशनूर कौर ने महात्मा गांधी के जीवन और विचारों से प्रेरित एक कविता सुनाई। उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में एक चिंतनशील और भावनात्मक आयाम जोड़ा और गांधी के आदर्शों की मानवतावादी और नैतिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर, भारतीय उन्नत अध्ययन संस्थान के फेलो प्रोफेसर देवी प्रसाद तिवारी ने "महात्मा गांधी और समकालीन संदर्भ" विषय पर एक विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने गांधी जी के व्यक्तित्व, विचार और सामाजिक दृष्टि के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला, साथ ही वर्तमान समय में उनके विचारों की निरंतर प्रासंगिकता को भी रेखांकित किया। उन्होंने गांधी के विचारों को सत्य, अहिंसा, नैतिकता, सामाजिक सद्भाव और मानवीय गरिमा जैसे मूल्यों के संदर्भ में समझने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रोफेसर तिवारी ने कहा कि गांधी के विचारों को केवल उनके ऐतिहासिक संदर्भ तक ही सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें निरंतर आत्मनिरीक्षण और सामाजिक संवाद के आधार के रूप में भी देखा जाना चाहिए। गांधी के जीवन और कार्य के विभिन्न पहलुओं के माध्यम से, उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि गांधी न केवल लक्ष्यों को बल्कि उन्हें प्राप्त करने के लिए अपनाए गए साधनों की शुद्धता को भी महत्व देते थे। उन्होंने कहा, गांधी का विचार व्यक्तिगत, सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में नैतिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने पर केंद्रित था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी के निदेशक प्रोफेसर हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने की। अपने अध्यक्षीय भाषण में उन्होंने महात्मा गांधी को आदरपूर्वक याद किया और उनके जीवन और विचारों की व्यापक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने देखा कि गांधी का व्यक्तित्व भारतीय और वैश्विक बौद्धिक परंपराओं में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है, जबकि सत्य और अहिंसा के साथ उनके प्रयोगों ने सामाजिक और राजनीतिक प्रवचन को एक नई दिशा दी।
प्रोफेसर चतुर्वेदी ने समकालीन सामाजिक और बौद्धिक परिवेश के संदर्भ में गांधी के विचारों को समझने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि गांधी जयंती केवल एक महान व्यक्तित्व को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि सत्य, अहिंसा, आत्म-अनुशासन, सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय संवेदनशीलता जैसे मूल्यों पर विचार करने का भी अवसर है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. राजीव कुमार मिश्रा, लाइब्रेरियन और अकादमिक संसाधन अधिकारी, भारतीय उन्नत अध्ययन संस्थान द्वारा किया गया। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की, गांधी जयंती के महत्व पर प्रकाश डाला तथा उपस्थित वक्ताओं एवं सदस्यों को उनकी भागीदारी के लिए आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के दौरान एक प्रमुख विचार जो उभरकर सामने आया वह यह था कि महात्मा गांधी के विचार उनके समय की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों तक ही सीमित नहीं हैं। बल्कि, सत्य, अहिंसा, नैतिक आचरण और मानवीय गरिमा जैसे मूल्यों पर जोर देने के कारण, यह प्रतिबिंब और प्रवचन के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता रहता है। इस प्रकार गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम ने इन स्थायी मूल्यों पर संवाद और आत्मनिरीक्षण का अवसर प्रदान किया।
इस अवसर पर शिक्षा मंत्रालय से प्राप्त निर्देशों के क्रम में उपस्थित सभी लोगों को स्वच्छता की शपथ भी दिलाई गयी। प्रतिज्ञा के माध्यम से, प्रतिभागियों ने स्वच्छता के प्रति अपनी व्यक्तिगत और सामूहिक जिम्मेदारी को बनाए रखने, स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण बनाए रखने में योगदान देने और स्वच्छता को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय अध्येताओं, टैगोर अध्येताओं, अध्येताओं, आईयूसी एसोसिएट्स, निवास के विद्वानों, अधिकारियों और कर्मचारियों और संस्थान परिवार के अन्य सदस्यों ने भाग लिया।
एसएस/एनके
यह प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति है, जिसे जारी किए गए रूप में पुन: प्रस्तुत किया गया है।
