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जनजातीय समुदायों के लिए संवैधानिक अधिकारों और कानूनी प्रावधानों पर राष्ट्रीय सम्मेलन

स्कोप कॉम्प्लेक्स, दिल्ली में आयोजित "आदिवासी समुदायों के लिए संवैधानिक अधिकार और कानूनी प्रावधान" (6 से 7 अक्टूबर 2026) पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन माननीय श्री जुआल ओरम द्वारा किया गया…
National Conclave on Constitutional Rights and Legal Provisions for Tribal Communities
Photo: PIB
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स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी), भारत सरकार — जनजातीय कार्य मंत्रालय · पीआईबी दिल्ली · मूल विज्ञप्ति pib.gov.in पर पढ़ें

दिल्ली के स्कोप कॉम्प्लेक्स में आयोजित "आदिवासी समुदायों के लिए संवैधानिक अधिकार और कानूनी प्रावधान" (6 से 7 अक्टूबर 2026) पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन जनजातीय मामलों के माननीय केंद्रीय मंत्री श्री जुआल ओरम ने किया।

कॉन्क्लेव का उद्देश्य देश भर के विभिन्न राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के आदिवासी कल्याण और राजस्व विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ प्रतिष्ठित विशेषज्ञों को एक साथ लाना है ताकि आदिवासी समुदायों को उनके संवैधानिक अधिकारों का लाभ उठाने में आने वाली चुनौतियों पर विचार-मंथन किया जा सके और संभावित सिफारिशें और सुधार के उपाय पेश किए जा सकें।  

अपने उद्घाटन भाषण में श्री जुएल ओराम ने प्रतिभागियों से अपने अनुभव और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने का आग्रह किया, जिससे अन्य लोग आदिवासी समुदायों के संवैधानिक अधिकारों और सुरक्षा उपायों से संबंधित मामलों पर एक-दूसरे से सीखने में सक्षम हो सकें। उन्होंने क्षेत्र स्तर के अधिकारियों से समुदायों के सामने आने वाली चुनौतियों को समझने के महत्व पर भी जोर दिया, जो केंद्र सरकार को समाधान और व्यावहारिक दिशानिर्देश देने में सक्षम बनाएगा।

माननीय जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभा को संबोधित किया। उन्होंने धोखाधड़ी वाले दावों के खिलाफ प्रभावी सुरक्षा उपाय बनाए रखते हुए सरल, पारदर्शी, समयबद्ध और नागरिक-अनुकूल प्रक्रियाओं की आवश्यकता पर जोर दिया।

जनजातीय मामलों की सचिव श्रीमती रंजना चोपड़ा ने आशा व्यक्त की कि दो दिवसीय सम्मेलन आम चुनौतियों, अनुकरणीय सर्वोत्तम प्रथाओं, रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण की भूमिका, सुव्यवस्थित दस्तावेज़ीकरण, ऑनलाइन ट्रैकिंग, प्रभावी शिकायत निवारण और मजबूत अंतर-राज्य सत्यापन तंत्र को सामने लाएगा।

सम्मेलन में लगभग 30 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के 75 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। कॉन्क्लेव में तकनीकी सत्र, खुली चर्चा और अनुभव साझा करने के सत्र होंगे।

कॉन्क्लेव के विचार-विमर्श से संवैधानिक सुरक्षा उपायों के कार्यान्वयन को मजबूत करने और आदिवासी समुदायों के लिए प्रभावी, पारदर्शी और सुलभ सुरक्षा और सेवाओं को बढ़ावा देने में योगदान मिलने की उम्मीद है।

यह प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति है, जिसे जारी किए गए रूप में पुन: प्रस्तुत किया गया है।

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स्रोत

यह पत्र सूचना कार्यालय (PIB), भारत सरकार द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति है — Ministry of Tribal Affairs, PIB Delhi. PIB की कॉपीराइट नीति के अनुसार इसे बिना बदलाव के प्रकाशित किया गया है।

मूल विज्ञप्ति देखें
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