स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी), भारत सरकार — सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय · पीआईबी दिल्ली · मूल विज्ञप्ति pib.gov.in पर पढ़ें
- वित्तीय सेवा विभाग द्वारा निर्देशित एससी लाभार्थियों की अनिवार्य योजना-वार और बैंक-वार रिपोर्टिंग
- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसएलबीसी/यूटीएलबीसी संयोजकों को दिशा-निर्देश जारी किए गए; कार्रवाई रिपोर्ट 9 अक्टूबर, 2026 तक प्रस्तुत की जाएगी
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) के हस्तक्षेप के बाद, वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने प्रमुख सरकारी वित्तीय योजनाओं के तहत अनुसूचित जाति के लाभार्थियों को प्रदान की गई सहायता की अनिवार्य रिपोर्टिंग के लिए निर्देश जारी किए हैं।
निर्देशों के तहत, राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों (एसएलबीसी) और यूटीएलबीसी को अपनी आवधिक समीक्षा बैठकों में पहचानी गई योजनाओं के तहत सहायता प्राप्त अनुसूचित जाति के लाभार्थियों की संख्या और प्रतिशत का योजना-वार और बैंक-वार विवरण शामिल करने की सलाह दी गई है।
उन्हें यह भी निर्देश दिया गया है कि वे नियमित रूप से राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के साथ जानकारी साझा करें और 9 अक्टूबर, 2026 तक वित्तीय सेवा विभाग को एक कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करें, जिसमें डेटा की उपलब्धता और संकलन में किसी भी मुद्दे के बारे में विवरण शामिल हैं।
वित्तीय सेवा विभाग ने आगे निर्देश दिया है कि रिपोर्टिंग बैंकों और कार्यान्वयन एजेंसियों के पास पहले से उपलब्ध डेटा का उपयोग करके की जानी चाहिए। यह समानांतर रिपोर्टिंग आवश्यकताओं को बनाए बिना परिभाषाओं और कार्यप्रणाली में स्थिरता सुनिश्चित करेगा। एसएलबीसी और यूटीएलबीसी को 30 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई पर अपडेट देने के लिए भी कहा गया है।
24 सितंबर, 2026 को, एनसीएससी के सचिव, श्री विवेक कुमार देवांगन ने वित्तीय सेवा विभाग के सचिव को पत्र लिखकर बताया कि राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की रिपोर्ट प्रधान मंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई), स्टैंड-अप इंडिया, प्रधान मंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी), पीएम स्वनिधि, सीजीटीएमएसई और एमएसएमई बिजनेस लोन सहित प्रमुख सरकारी योजनाओं के तहत सहायता प्राप्त अनुसूचित जाति परिवारों और लाभार्थियों के प्रतिशत को प्रतिबिंबित नहीं कर रही है।
आयोग ने बताया था कि इस तरह के डेटा की अनुपस्थिति अनुसूचित जातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास की प्रगति का मूल्यांकन करने के लिए अनुच्छेद 338(5)(सी) के तहत उसके संवैधानिक जनादेश के निर्वहन में बाधा उत्पन्न कर रही थी। जवाब में, वित्तीय सेवा विभाग ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सभी एसएलबीसी/यूटीएलबीसी संयोजकों को 5 अक्टूबर, 2026 को निर्देश जारी किए।
इन निर्देशों से अनुसूचित जाति समुदायों को वित्तीय समावेशन लाभ के वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करने की उम्मीद है। योजना-वार और बैंक-वार डेटा की उपलब्धता राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का अधिक प्रभावी ढंग से निर्वहन करने और अनुसूचित जातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास की प्रगति का आकलन करने में सक्षम बनाएगी।
श्री देवांगन ने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग इन निर्देशों के कार्यान्वयन की निगरानी करना जारी रखेगा और यह सुनिश्चित करने के लिए हितधारकों के साथ जुड़ा रहेगा कि सरकारी योजनाओं का लाभ अनुसूचित जाति के लाभार्थियों तक मापने योग्य और न्यायसंगत तरीके से पहुंचे।
पीआर-158- टीएआर/केवी/आरके
यह प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति है, जिसे जारी किए गए रूप में पुन: प्रस्तुत किया गया है।
