લાઇવ रविवार, 11 अक्टूबर 2026
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સમુદ્ર પર શાસન આધારિત સિસ્ટમ માટે અપીલ: સાગરમંથનમાં PM મોદીનો સંદેશ

સાગરમંથનની ત્રીજી આવૃત્તિ માટે મોકલવામાં આવેલા સંદેશમાં વડાપ્રધાન નરેન્દ્ર મોદીએ ખુલ્લી, સલામત અને નિયમ આધારિત દરિયાઈ વ્યવસ્થાની માંગ કરી હતી. ભારતના મુખ્ય બંદરોની ક્ષમતા બમણી કરવા અંગે પણ ઉલ્લેખ કર્યો છે.
Modi urges rules-based maritime order at Sagarmanthan dialogue
Photo: PIB

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  • PM मोदी ने 'मुक्त, खुली, सुरक्षित और नियमों पर आधारित' समुद्री व्यवस्था का आह्वान किया
  • सागरमंथन का आयोजन नई दिल्ली में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय और ORF ने किया
  • प्रमुख बंदरगाहों की क्षमता लगभग दोगुनी हुई, टर्नअराउंड समय में काफी कमी आई
  • सरकार समुद्र विज्ञान और अन्वेषण में निवेश कर रही है और नई पीढ़ी के समुद्री कानून लाई है
  • भारतीय नाविक दुनिया में समुद्री क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी श्रमशक्ति बने

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सागरमंथन के तीसरे संस्करण के लिए एक लिखित संदेश भेजा। इसमें उन्होंने खुली, सुरक्षित और नियमों पर आधारित समुद्री व्यवस्था की जरूरत बताई। यह व्यवस्था सभी देशों के लिए शांति और समृद्धि लाने वाली होनी चाहिए।

सागरमंथन: द ग्रेट ओशन्स डायलॉग का आयोजन नई दिल्ली में हो रहा है। इसे पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (एमओपीएसडब्ल्यू) और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) मिलकर कर रहे हैं। इसमें दुनिया भर के नीति-निर्माता, समुद्री क्षेत्र की हस्तियां और विशेषज्ञ शामिल हैं।

सहयोग और जिम्मेदारी पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक हिस्से की घटनाओं का असर दूर के इलाकों पर भी पड़ सकता है। इसलिए महासागरों पर वैश्विक संवाद और सहयोग पहले से ज्यादा जरूरी है। उन्होंने महासागरों में दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं, लोगों और धरती के लिए अपार संभावनाएं बताईं।

उन्होंने कहा कि भारत का समुद्र से रिश्ता जिम्मेदारी का भी है। देश एक मजबूत समुद्री अर्थव्यवस्था बना रहा है और साथ ही महासागरों व तटीय इकोसिस्टम की सेहत की रक्षा कर रहा है। भारत का विजन सहयोग, विश्वास, आपसी सम्मान और सबके लाभ पर टिका है।

बंदरगाह, इतिहास और 2047 का लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने भारत के समुद्री इतिहास का जिक्र किया। इसमें लोथल, चोल राजवंश और छत्रपति शिवाजी महाराज की नौसेना से जुड़ी सोच शामिल है। उन्होंने कहा कि भारतीय नाविक और व्यापारी सामान, विचार और संस्कृति दूर-दराज तक ले गए।

उन्होंने देश की समुद्री महत्वाकांक्षाओं को ‘विकसित भारत’ से जोड़ा। सरकार का लक्ष्य 2047 तक भारत को विकसित देश बनाना है। प्रधानमंत्री के मुताबिक, प्रमुख बंदरगाहों की क्षमता लगभग दोगुनी हो गई है और टर्नअराउंड समय में काफी कमी आई है।

सरकार समुद्र विज्ञान और अन्वेषण में निवेश कर रही है। भारत नई पीढ़ी के समुद्री कानून भी लेकर आया है, ताकि इस क्षेत्र के लिए आधुनिक ढांचा बने। प्रधानमंत्री ने भारतीय नाविकों को दुनिया में समुद्री क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी श्रमशक्ति बताया।

प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि सागरमंथन साझा समृद्धि की इस सोच को मजबूत करेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस संवाद से नए विचार आएंगे, गहरी साझेदारियां बनेंगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए नए अवसर खुलेंगे।

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