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- 31 अगस्त, 2026 तक 25,367 मोबाइल टावर चालू हो चुके थे
- ये टावर 35,771 गांवों और स्थानों को कवर कर रहे हैं
- राइट ऑफ वे आवेदनों के लिए 67 दिन और भारतनेट के लिए 7 दिन की समय-सीमा
- 36 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को केन्द्रीय आरओडब्ल्यू पोर्टल पर लाइव किया गया
- अगस्त 2026 तक 28,700 ग्राम पंचायतों का भारतनेट के तहत उन्नयन हुआ
देशभर में 25,367 मोबाइल टावर चालू हो चुके हैं। ये टावर 35,771 गांवों और स्थानों को कवर कर रहे हैं। दूरसंचार विभाग ने राज्यों के साथ बैठक में इसी विस्तार पर चर्चा की।
संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) 2026 के मौके पर राज्यों के आईटी मंत्रियों और सचिवों के साथ उच्चस्तरीय गोलमेज बैठक की। बैठक की अध्यक्षता केन्द्रीय संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने केन्द्रीय राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी और दूरसंचार विभाग के सचिव अमित अग्रवाल के साथ मिलकर की। बैठक का मकसद केन्द्र, राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के बीच तालमेल बढ़ाना था।
राइट ऑफ वे में तेजी पर जोर
सिंधिया ने कहा कि दूरसंचार विषय संघ सूची में है, पर डिजिटल ढांचा राज्यों की जमीन पर बनता है। उन्होंने राज्यों से टीम इंडिया की तरह काम करने को कहा।
बैठक में दूरसंचार (राइट ऑफ वे) नियम, 2024 के लागू होने पर जोर दिया गया। ये नियम 1 जनवरी, 2025 से प्रभावी हैं। सामान्य आवेदनों के लिए 67 दिन और भारतनेट जैसी विशेष परियोजनाओं के लिए 7 दिन की समय-सीमा तय है।
34 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों ने स्थानीय निकायों को इन नियमों का पालन करने के आदेश या अधिसूचनाएं जारी कर दी हैं। सभी 36 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को केन्द्रीय आरओडब्ल्यू पोर्टल पर लाइव किया जा चुका है। पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता (एसएएससीआई) योजना 2026–27 में 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान है।
भारतनेट और 4जी की प्रगति
बैठक में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम (एबीपी) की प्रगति की भी समीक्षा हुई। इसका लक्ष्य मौजूदा नेटवर्क को उन्नत करना, नई ग्राम पंचायतों को जोड़ना और 1.5 करोड़ फाइबर इंटरनेट कनेक्शन देना है।
अगस्त 2026 तक एबीपी के तहत 55,780 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा चुकी थी। 28,700 ग्राम पंचायतों का उन्नयन कर उन्हें कनेक्टिविटी से जोड़ा गया है।
डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) से दूरदराज के इलाकों में मोबाइल कनेक्टिविटी बढ़ाने की परियोजनाएं भी चल रही हैं। इन गांवों में कंपनियां कारोबारी कारणों से नेटवर्क नहीं लगा रही थीं। बीएसएनएल की 4जी सैचुरेशन परियोजना में स्वदेशी 4जी स्टैक का इस्तेमाल हो रहा है।
साइबर धोखाधड़ी पर समन्वय और समृद्ध ग्राम
बैठक में संचार साथी पहल और साइबर अपराध व वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने पर चर्चा हुई। संचार साथी से लोग संदिग्ध कॉल और संदेश की शिकायत कर सकते हैं और अपने नाम के मोबाइल कनेक्शन जांच सकते हैं। खोए या चोरी हुए फोन को ब्लॉक और ट्रेस करने की सुविधा भी इसी में है।
डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (डीआईपी) को साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ खुफिया जानकारी साझा करने का अहम जरिया बताया गया। समृद्ध ग्राम फिजिटल सर्विसेज इनिशिएटिव में टेली-कंसल्टेशन, डिजिटल कक्षा, बैंकिंग, मृदा परीक्षण और ड्रोन आधारित कृषि सेवाएं एक ही जगह मिलती हैं। इसका पायलट मध्य प्रदेश के उमरी, उत्तर प्रदेश के चौरावाला और आंध्र प्रदेश के नरकोडुरु में चल रहा है। इस मॉडल को डब्ल्यूएसआईएस प्राइजेज 2026 में विजेता का सम्मान मिला है।
बैठक के अंत में केन्द्र, राज्यों और दूरसंचार उद्योग के बीच तालमेल, तेज तैनाती और नागरिक-केन्द्रित सेवाओं के विस्तार का साझा संकल्प दोहराया गया।
