लाइव गुरूवार, 08 अक्टूबर 2026
ब्रेकिंग
राजनीति

भारत ने आगामी यूएनएफसीसीसी सीओपी31 में महत्वाकांक्षी और संतुलित परिणाम प्राप्त करने के लिए लचीलेपन, व्यावहारिकता और पारस्परिक सम्मान की अपील की

जलवायु वित्त, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण के विस्तार की आवश्यकता: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव
India calls for Flexibility, Pragmatism and Mutual Respect to secure Ambitious and Balanced Outcomes at upcoming UNFCCC COP31
Photo: PIB

स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय (PIB), भारत सरकार — पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय · PIB Delhi · मूल विज्ञप्ति pib.gov.in पर पढ़ें

  • जलवायु वित्त, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण के विस्तार की आवश्यकता: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव
  • राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित मार्गों का सम्मान करें; केवल चर्चा नहीं, कार्यान्वयन और संयोजन की ओर बढ़ना आवश्यक

भारत ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा संधि (यूएनएफसीसीसी) के 31वें सम्मेलन में शेष मतभेदों को दूर करने और महत्वाकांक्षी एवं संतुलित परिणाम प्राप्त करने के लिए सभी पक्षों से अधिक लचीलेपन, व्यावहारिकता और आपसी सम्मान की अपील की है। फिजी में आयोजित पूर्व-सीओपी31 बैठक में राजनीतिक सहमति क्षेत्रों और परिणामों पर पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को देखते हुए अब केवल बयानबाजी से आगे बढ़कर कार्यान्वयन और समन्वय की आवश्यकता है।

Addressed the Plenary on Political Landing Zones at Pre COP 31 in Nadi, Fiji. Called for an ambitious and balanced outcome at COP 31, where higher ambition is matched by climate finance, technology transfer and capacity-building, and implementation respects nationally determined pathways.

— Bhupender Yadav (@byadavbjp) October 8, 2026

श्री यादव ने पूर्व-सीओपी के दौरान हुई चर्चाओं पर टिप्‍पणी करते हुए कहा कि सभी पक्षों के बीच मतभेदों की तुलना में साझा विचार कहीं अधिक व्यापक हैं। उन्होंने वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के प्रति सामूहिक रूप से प्रतिबद्ध रहने पर व्यापक सहमति पर प्रकाश डाला। श्री यादव ने यह स्वीकार करते हुए कहा कि विशेष रूप से जलवायु वित्तपोषण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण के माध्यम से उच्च महत्वाकांक्षा के लिए समानुपातिक रूप से उच्च प्रतिबद्धताओं की आवश्यकता है। उन्‍होंने कार्यान्वयन की दिशा में सामूहिक ध्यान केंद्रित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत का दृढ़ विश्वास है कि कार्यान्वयन में राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित मार्गों का सम्मान किया जाना चाहिए, जिससे कि प्रत्येक देश अपनी विशिष्ट राष्ट्रीय परिस्थितियों और विकास संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार परिवर्तन करने में सक्षम हो सके।

श्री यादव ने जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई को गति देने के लिए नवीन समाधानों और निरंतर सुधारों की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक लक्ष्य तो साझा हैं, लेकिन उन्हें प्राप्त करने के तरीकों में अधिक सामंजस्य की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “सभी पक्षों को लचीलापन दिखाने का समय आ गया है। उन्‍होंने सम्मेलन और पेरिस समझौते के तहत पहले से उपलब्ध साधनों के अनुकूलन का भी आह्वान किया। उन्होंने अस्थायी एजेंडा में अनुच्छेद 9.1 को शामिल करने को देशों की आवश्यकताओं के अनुरूप वित्त के समायोजन के लिए एक महत्वपूर्ण औपचारिक अवसर बताया। साथ ही, सतत विकास के लिए वित्त और कार्यान्वयन के अन्य साधनों में महत्वपूर्ण कमियों को दूर करने और बाजार-संचालित संसाधनों का उपयोग करने के लिए अनुच्छेद 6 के सहयोगात्मक दृष्टिकोणों के रणनीतिक इस्‍तेमाल पर भी जोर दिया।

श्री यादव ने कहा कि भारत को सीओपी31 से अपेक्षा है कि वह सहभागिता, तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण के लिए लक्षित समर्थन को बढ़ाने की दिशा में एक निर्णायक मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने कहा कि भारत सीओपी31 से पूर्व इन मुद्दों को सुलझाने के लिए खुले और पारदर्शी संवाद के लिए तैयार है, ताकि वैश्विक समुदाय, विशेष रूप से सबसे निर्बल पक्षों के लिए “संतुलित, न्यायसंगत और ऐतिहासिक परिणाम” सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि समावेशी, परामर्शकारी और सर्वसम्मति-आधारित दृष्टिकोण के माध्यम से सीओपी31 में जलवायु बहुपक्षवाद को सुदृढ किया जा सकता है।

भारत की ओर से अपने संबोधन का समापन करते हुए श्री यादव ने कहा, “फिजी से विदा लेते समय हमारा उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए: इन चर्चाओं के रचनात्मक पहलुओं को अंताल्या तक ले जाना।” उन्होंने कहा कि अंतिम परिणाम महत्वाकांक्षी और संतुलित होना चाहिए, जो विकासशील देशों को आवश्यक कार्यान्वयन के साधन उपलब्ध कराते हुए शमन और अनुकूलन को बढ़ावा दे। उन्होंने इस उद्देश्य की दिशा में प्रेसीडेंसी, अध्यक्षों और सभी दलों के साथ मिलकर काम करने के लिए भारत की तत्परता को दोहराया।

अंत में, श्री यादव ने संवाद के लिए नियुक्‍त अध्यक्ष श्री क्रिस बोवेन को पूर्व-सीओपी31 के दौरान खुली और सार्थक चर्चा सुनिश्चित करने के उनके प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया और सीओपी31 की सफलता के लिए सीओपी31 अध्यक्ष को शुभकामनाएं दीं। पूर्व-सीओपी संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन से कुछ सप्ताह पहले आयोजित होने वाली एक तैयारी बैठक है, जो इस वर्ष नवंबर में तुर्की के अंताल्या में आयोजित की जाएगी।

यह पत्र सूचना कार्यालय (PIB) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति है, जिसे बिना बदलाव के प्रकाशित किया गया है।

स्रोत

यह पत्र सूचना कार्यालय (PIB), भारत सरकार द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति है — पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, PIB Delhi. PIB की कॉपीराइट नीति के अनुसार इसे बिना बदलाव के प्रकाशित किया गया है।

मूल विज्ञप्ति देखें
यह ख़बर साझा करें और हमारे सोशल मीडिया से जुड़ें: