- मनीला में 20वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन की ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में भारत का पक्ष रखा गया
- आसियान कार्य योजना 2026-2030 का स्वागत, पावर ग्रिड और स्वच्छ ऊर्जा पर सहयोग का समर्थन
- 30 सितंबर, 2026 तक स्थापित क्षमता 558.8 गीगावाट, जिसमें 55 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन से
- सिंगापुर तक लगभग 3,000 किलोमीटर भूमि आधारित पारेषण गलियारे का विकल्प विचाराधीन
- भारत ने संस्थागत साझेदारी और ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी भंडारण जैसे क्षेत्रों में अनुभव साझा करने की इच्छा जताई
भारत ने फिलीपींस की राजधानी मनीला में 20वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन की ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में क्षेत्रीय ऊर्जा सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर दिया। विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने आज भारत की ओर से यह बात रखी।
आसियान के साथ सहयोग पर जोर
नाइक ने भारत की एक्ट ईस्ट नीति और आसियान के साथ व्यापक रणनीतिक साझेदारी का जिक्र किया। उन्होंने ऊर्जा सहयोग के लिए आसियान कार्य योजना 2026-2030 का स्वागत किया।
उन्होंने आसियान-भारत कार्य योजना 2026-2030 के तहत पावर ग्रिड, क्षेत्रीय बिजली पारेषण, बहुपक्षीय बिजली व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा में सहयोग को आगे बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2025 में 22वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में आसियान पावर ग्रिड पहल को समर्थन देने की घोषणा की थी। इसके लिए ग्रिड कनेक्टिविटी में 400 पेशेवरों को प्रशिक्षण देने की बात कही गई थी।
भारत में बिजली उत्पादन की तस्वीर
नाइक ने बताया कि 30 सितंबर, 2026 तक देश की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 558.8 गीगावाट तक पहुंच गई है। इसमें से 308 गीगावाट क्षमता गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से है, जो कुल क्षमता का 55 प्रतिशत है।
प्रधानमंत्री सूर्यघर परियोजना के तहत 29 सितंबर, 2026 तक लगभग 50.1 करोड़ रूफटॉप सौर पैनल लग चुके हैं। इनसे 59.5 करोड़ घरों को फायदा मिला है।
नाइक के मुताबिक भारत ने जून 2025 तक गैर-जीवाश्म ईंधन से संचयी स्थापित क्षमता का 50 प्रतिशत हासिल कर लिया था। यह 2030 के राष्ट्रीय विकास लक्ष्य (एनडीसी) से पांच साल पहले हुआ।
सिंगापुर तक सीमा पार बिजली लिंक की योजना
भारत और सिंगापुर प्रस्तावित 2,000 मेगावाट की सीमा पार बिजली कनेक्टिविटी के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। इनमें एक विकल्प लगभग 3,000 किलोमीटर लंबा भूमि आधारित पारेषण गलियारा है।
यह गलियारा भारत के इम्फाल को म्यांमार, थाईलैंड और मलेशिया होते हुए सिंगापुर से जोड़ेगा। नाइक के अनुसार इस योजना से भरोसेमंद सीमा-पार बिजली व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा के एकीकरण और क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिल सकती है।
तकनीक और संस्थागत साझेदारी का प्रस्ताव
नाइक ने ईएएस के सदस्य देशों के साथ भारत का अनुभव बांटने की इच्छा जताई। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा का बड़े पैमाने पर उपयोग, ग्रिड एकीकरण, पारेषण योजना, ऊर्जा भंडारण, ग्रीन हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकें शामिल हैं।
उन्होंने एनटीपीसी, पावरग्रिड, सीईए, एनआईडब्ल्यूई, एनआईएसई और एनपीटीआई जैसे भारतीय संस्थानों और आसियान ऊर्जा केंद्र के बीच संस्थागत रिश्ते मजबूत करने का आग्रह किया।
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार, आपात तैयारी, बिजली प्रणाली को मजबूत करने, एलएनजी और गैस आपूर्ति सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा पूर्वानुमान, बैटरी भंडारण और ग्रीन हाइड्रोजन पर सहयोग के मौके उन्होंने सामने रखे। सीसीयूएस और कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना पर आसियान साझेदारों के साथ ज्ञान बांटने में भारत की रुचि भी उन्होंने जताई। यह काम सहभागी देशों की प्राथमिकताओं और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर होगा।
अंत में नाइक ने आसियान पावर ग्रिड पर उन्नत समझौता ज्ञापन के लागू होने का समर्थन किया। साथ ही बहुपक्षीय बिजली व्यापार बढ़ाने की आसियान की कोशिशों को भारत के समर्थन की बात दोहराई।
