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आईआईएम काशीपुर में भव्य समापन समारोह के साथ हिंदी माह 2026 का समापन हुआ

-विभिन्न हिंदी प्रतियोगिताओं के विजेताओं एवं प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया
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स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी), भारत सरकार — शिक्षा मंत्रालय · पीआईबी देहरादून · मूल विज्ञप्ति pib.gov.in पर पढ़ें

  • -विभिन्न हिंदी प्रतियोगिताओं के विजेताओं एवं प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया
  • - वार्षिक हिंदी पत्रिका 'जलाश्म' का अनावरण
  • - विशेषज्ञ शिक्षा, ज्ञान और व्यावसायिक कार्यों में हिंदी की समकालीन प्रासंगिकता और व्यापक उपयोग पर जोर देते हैं

भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) काशीपुर में बुधवार को 'हिंदी माह 2026' का समापन समारोह आयोजित किया गया। समारोह में हिंदी भाषा और साहित्य की समकालीन भूमिका पर चर्चा हुई और पूरे महीने आयोजित हिंदी से संबंधित विभिन्न गतिविधियों और प्रतियोगिताओं का समापन हुआ। विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं और प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया और संस्थान की वार्षिक हिंदी पत्रिका 'जलाश्म' का अनावरण किया गया।

समारोह की अध्यक्षता आईआईएम काशीपुर के निदेशक प्रो.नीरज द्विवेदी ने की। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के कुलपति प्रोफेसर शिवेंद्र कुमार कश्यप मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि शिक्षाविद् और लेखक प्रोफेसर रामेश्वर राय सम्मानित अतिथि थे। कार्यक्रम के दौरान प्रो.रामेश्वर राय ने 'समसामयिक संदर्भों में हिंदी साहित्य एवं भाषा की भूमिका' विषय पर विशेष व्याख्यान दिया।

समारोह के दौरान हिंदी माह के अंतर्गत आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाण पत्र प्रदान किये गये। प्राप्त परिणामों के अनुसार निबंध लेखन प्रतियोगिता में मनीष कुमार शर्मा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। पत्र लेखन में शरद कुमार श्रीवास्तव, कविता लेखन में सौरभ पाठक तथा ऑनलाइन सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता में शुभम कुमार प्रथम स्थान पर रहे। अन्य श्रेणियों के प्रतिभागियों को भी उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। समापन समारोह के दौरान पूर्व में आयोजित तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता के परिणाम भी घोषित किये गये।

मुख्य अतिथि प्रोफेसर शिवेंद्र कुमार कश्यप ने अपने संबोधन में भाषा को व्यक्ति की पहचान से जोड़ा और मातृभाषा के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा, "किसी व्यक्ति के मौलिक विचार और सपने स्वाभाविक रूप से उसकी अपनी भाषा में आकार लेते हैं।" उन्होंने दैनिक जीवन में हिंदी के घटते उपयोग की ओर ध्यान आकर्षित किया और भाषा के संरक्षण के लिए सचेत प्रयासों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया, जिसमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) रैंकिंग में इसकी स्थिति और सामुदायिक रेडियो से संबंधित पहल भी शामिल है।

विशिष्ट अतिथि प्रो.रामेश्वर राय ने अपने विशेष व्याख्यान में भारतीय शिक्षा एवं भाषाओं की ऐतिहासिक स्थिति पर चर्चा की। 1835 में शुरू हुई औपनिवेशिक शिक्षा नीतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन नीतियों ने अंग्रेजी को प्रमुखता देते हुए स्वदेशी शिक्षा प्रणालियों और भाषाओं को पृष्ठभूमि में धकेल दिया। उनके अनुसार, प्रभाव भाषा से परे समाज की सांस्कृतिक संरचना तक फैला हुआ है। उन्होंने औपनिवेशिक व्यवस्था के दीर्घकालिक प्रभाव को निरंतर सांस्कृतिक निर्भरता से जोड़ा।

हिंदी की समसामयिक स्थिति पर चर्चा करते हुए प्रो राय ने कहा कि बाजार और मनोरंजन की भाषा के रूप में हिंदी आज भी मजबूत है, लेकिन गहन ज्ञान और दार्शनिक चिंतन की भाषा के रूप में इसकी क्षमता कमजोर हो रही है. उन्होंने भाषा के प्रश्न को व्यापक समसामयिक चुनौतियों से भी जोड़ा। उनके अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का अनियंत्रित विस्तार, धार्मिक संघर्ष और पर्यावरणीय गिरावट जैसे मुद्दे केवल तकनीकी या राजनीतिक प्रश्न नहीं हैं, बल्कि इसमें मानव आत्म-जागरूकता और सांस्कृतिक जड़ों के साथ संबंध के प्रश्न भी शामिल हैं। उन्होंने आत्मनिरीक्षण और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दोबारा जुड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

अपने अध्यक्षीय भाषण में प्रो.नीरज द्विवेदी ने हिंदी के व्यावहारिक एवं संस्थागत प्रयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अनुवाद प्रौद्योगिकियां लगातार भाषाओं के बीच बाधाओं को कम कर रही हैं, जिससे व्यावसायिक कार्यों में हिंदी का उपयोग पहले की तुलना में अधिक व्यावहारिक हो गया है। उन्होंने हिंदी को केवल एक दायित्व के रूप में अपनाने के बजाय इसे अपनेपन और गौरव की स्वाभाविक भावना के साथ प्रयोग करने की वकालत की। इस अवसर पर उन्होंने संस्थान के सदस्यों से आधिकारिक पत्राचार और दैनिक प्रशासनिक कार्यों में हिंदी का प्रयोग बढ़ाने का आह्वान किया।

समारोह के दौरान आईआईएम काशीपुर की वार्षिक हिंदी पत्रिका 'जलाश्म' का भी अनावरण किया गया। उपलब्ध सामग्री के अनुसार अतुल कुमार श्रीवास्तव ने पत्रिका का नाम सुझाने में योगदान दिया। पत्रिका का अनावरण हिंदी माह की समापन गतिविधियों के हिस्से के रूप में किया गया था और यह समारोह के मुख्य आकर्षणों में से एक थी।

स्कूली छात्रों और अन्य प्रतिभागियों के लिए हिंदी माह के दौरान आयोजित गतिविधियों ने हिंदी में लेखन, सार्वजनिक भाषण और अभिव्यक्ति के लिए एक मंच प्रदान किया। इससे पहले, 16 स्कूलों के 27 छात्रों ने तात्कालिक भाषण प्रतियोगिता में भाग लिया था, जिसके परिणाम समापन समारोह के दौरान घोषित किए गए थे।

समापन समारोह के साथ ही आईआईएम काशीपुर में हिंदी माह 2026 के तहत आयोजित माह भर की गतिविधियों का औपचारिक समापन हो गया। कार्यक्रम में हिंदी को न केवल एक औपचारिक भाषा के रूप में, बल्कि दैनिक संचार, ज्ञान, लेखन और व्यावसायिक कार्यों में अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

यह प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति है, जिसे जारी किए गए रूप में पुन: प्रस्तुत किया गया है।

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स्रोत

यह पत्र सूचना कार्यालय (PIB), भारत सरकार द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति है — Ministry of Education, PIB Dehradun. PIB की कॉपीराइट नीति के अनुसार इसे बिना बदलाव के प्रकाशित किया गया है।

मूल विज्ञप्ति देखें
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