- अमेरिका ने कुछ कंपनियों को PERM कार्यक्रम से निलंबित किया; भारत का कहना है H-1B वैधता पर असर नहीं
- निलंबित कंपनियों के योग्य कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है
- जायसवाल ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance की गैर-अमेरिकी कामगारों पर टिप्पणी को अनुचित बताया
- GoF on S4 के सह-अध्यक्ष भारत और लाइबेरिया ने जहाजों और नाविकों पर हमलों की कड़ी निंदा की
- S4 पर पहली GoF बैठक न्यूयॉर्क में हुई, इसमें 25 देश शामिल हुए
भारत ने कहा है कि अमेरिका द्वारा कुछ कंपनियों को PERM कार्यक्रम से निलंबित करने से मौजूदा H-1B वीज़ा पर सीधा असर नहीं पड़ता। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में मीडिया ब्रीफिंग में यह बात कही।
प्रतिभा का आवागमन दोनों तरफ़ से फायदेमंद
जायसवाल ने कहा कि प्रतिभा का आवागमन भारत और अमेरिका, दोनों की अर्थव्यवस्थाओं में मूल्य जोड़ता है। उनके अनुसार इससे भारतीयों को अवसर मिलते हैं और अमेरिकी कंपनियों को कुशल प्रतिभा तक पहुंच।
उन्होंने कहा कि ऐसा आवागमन नवाचार, शोध, उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देता है, और नौकरियां पैदा करने में मदद करता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इससे अमेरिका में शेयरधारकों की संपत्ति बढ़ती है और यह दोनों के लिए बड़ा आपसी फायदा है।
PERM फैसले पर उन्होंने कहा कि निलंबन से प्रभावित कंपनियों के योग्य कर्मचारियों की स्थायी निवास या ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।
वांस की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया
जायसवाल ने गैर-अमेरिकी कामगारों पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ऐसी बातें अनुचित हैं और अमेरिका में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों की उच्च शिक्षा को नज़रअंदाज़ करती हैं।
उन्होंने बताया कि अमेरिकी इतिहास को कई पीढ़ियों के आप्रवासन ने आकार दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि दर्दनाक ऐतिहासिक और औपनिवेशिक अर्थ वाले शब्द गहरे तक आपत्तिजनक हैं।
समुद्री सुरक्षा और UN पर्यवेक्षक समूह
भारत और लाइबेरिया ने Group of Friends on Safety and Security of Shipping and Seafarers (GoF on S4) के सह-अध्यक्ष के रूप में खाड़ी और काला सागर क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों और नाविकों पर हमलों की कड़ी निंदा की है।
समूह की पहली बैठक न्यूयॉर्क में हुई। विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर और लाइबेरिया के विदेश मंत्री ने इसकी अगुवाई की, और इसमें 25 देश जुड़े। मकसद नाविकों और जहाज़रानी की सुरक्षा को वैश्विक चर्चा के केंद्र में रखना और व्यावसायिक जहाज़रानी को बाधित होने से बचाना है।
भारत और पाकिस्तान के बीच UN मिलिट्री ऑब्ज़र्वर ग्रुप के बारे में पूछे जाने पर जायसवाल ने कहा कि भारत लगातार यह मानता रहा है कि दोनों देशों के बीच शिमला समझौते के बाद इसकी प्रासंगिकता खत्म हो चुकी है।
