स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय (PIB), भारत सरकार — सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय · PIB Delhi · मूल विज्ञप्ति pib.gov.in पर पढ़ें
- पिछले पांच वर्षों में वन्यजीव सुरक्षा से जुड़ी अवसंरचना और पर्यावरण संरक्षण के उपायों पर 19,700 करोड़ रुपये से ज़्यादा का निवेश किया गया
- देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों पर 2,150 से अधिक वन्यजीव सुरक्षा संरचनाओं का निर्माण किया गया/या प्रस्ताव रखा गया
राष्ट्रीय राजमार्ग योजना, डिजाइन और कार्यान्वयन में वन्यजीव संरक्षण को शामिल करने की पहलों को रेखांकित करते हुए, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने 2 से 8 अक्टूबर 2026 तक मनाए जा रहे ‘राष्ट्रीय वन्यजीव सप्ताह’ के अवसर पर ‘वन्यजीव सुरक्षा उपाय और संरचनाएं’ पर एक दस्तावेज़ जारी किया। यह दस्तावेज़ हाल ही में एकता नगर, गुजरात में आयोजित चिंतन शिविर के दौरान सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी द्वारा जारी किया गया था। यह दस्तावेज़ एनएचएआई के उस दृष्टिकोण को दर्शाता है जिसके तहत राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना के विकास में कनेक्टिविटी और गतिशीलता की ज़रूरतों के साथ-साथ पर्यावरण संवहनीयता और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बना रहे।
पिछले पांच वर्षों में, राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में वन्यजीव सुरक्षा से जुड़ी अवसंरचना और पर्यावरण संरक्षण उपायों में लगभग 19,700 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। इन हस्तक्षेपों का उद्देश्य यातायात की सुरक्षित आवाजाही को बनाए रखते हुए, राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना के विकास से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों—जैसे कि प्राकृतिक आवासों का विखंडन, मार्ग में आने वाली रुकावटें और वन्यजीवों व गाड़ियों की टक्कर का समाधान करना है।
एनएचएआई की सुरक्षा योजनाएँ परियोजना गलियारों की पारिस्थितिक संवेदनशीलता, वन्यजीवों की आवाजाही के पैटर्न और अवसंरचना डिजाइन की तकनीकी व्यवहार्यता पर आधारित होता है। यह वन्यजीव सुरक्षा उपायों को प्रत्येक राजमार्ग गलियारे की विशिष्ट पारिस्थितिक और इंजीनियरिंग आवश्यकताओं के अनुसार नियोजित करने में सक्षम बनाता है।
2,150 से अधिक वन्यजीव सुरक्षा संरचनाएं
यह दस्तावेज़ वन्यजीव सुरक्षा नियोजन के लिए एक व्यवस्थित ढांचे को रेखांकित करता है, जिसमें अंडरपास, ओवरपास, पुलिया (कलवर्ट) और कैनोपी क्रॉसिंग जैसे संरचनात्मक उपायों के साथ-साथ साइनबोर्ड, बाड़ (फेंसिंग) और गति नियंत्रण जैसे गैर-संरचनात्मक हस्तक्षेप भी शामिल हैं। देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ 2,150 से अधिक वन्यजीव सुरक्षा उपायों से सम्बंधित संरचनाओं का निर्माण किया गया है/या प्रस्ताव दिया गया है। इनमें जानवरों के लिए अंडरपास (एयूपी), पुल-एकीकृत क्रॉसिंग (जैसे मुख्य ब्रिज-सह-एयूपी और छोटे ब्रिज-सह-एयूपी), जानवरों की आवाजाही के लिए अनुकूलित पुलिया, कैनोपी क्रॉसिंग और अन्य विशेष संरचनाएं शामिल हैं।
संरचनात्मक सुरक्षा उपायों के तहत, जानवरों के लिए अंडरपास में लगभग 4,600 करोड़ रुपये’ ओवरपास में 650 करोड़ रुपये, वायडक्ट (ऊंचे पुलों) पर 8,300 करोड़ रुपये, सुरंगों में 2,800 करोड़ रुपये, बड़े पुलों में 2,500 करोड़ रुपये और छोटे पुलों में 500 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। ये संरचनाएं राजमार्ग गलियारों में वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही को आसान बनाती हैं और प्राकृतिक आवासों के बीच पारिस्थितिक जुड़ाव बनाए रखने में मदद करती हैं।
एनएचएआई ने इन संरचनात्मक उपायों के साथ-साथ कई गैर-संरचनात्मक हस्तक्षेपों को भी शामिल किया है, जिनका उद्देश्य वन्यजीवों के व्यवधान को कम करना और उनके प्राकृतिक आवास की स्थितियों में सुधार करना है। इनमें ध्वनि अवरोधक (नॉइज़ बैरियर), सरीसृप पारपथ (रेप्टाइल क्रॉसिंग), वर्षा जल संचयन और अन्य वन्यजीव प्रबंधन उपाय शामिल हैं।
वन्यजीव संरक्षण के लिए एकीकृत दृष्टिकोण
वन्यजीवों को तय क्रॉसिंग संरचनाओं की ओर ले जाने और जानवरों व वाहनों के बीच टकराव की संभावना को कम करने के लिए, 300 किलोमीटर से अधिक राष्ट्रीय राजमार्ग मार्गों पर गाइड फेंसिंग (मार्गदर्शक बाड़) और ध्वनि अवरोधक (नॉइज़ बैरियर) लगाए गए हैं।
एनएचएआई ने वन्यजीवों की आवाजाही के पैटर्न का पता लगाने और बचाव के उपायों के समय-समय पर मूल्यांकन में मदद के लिए कैमरा ट्रैपिंग जैसे निगरानी सिस्टम भी बनाए हैं। वन्यजीवों और गाड़ियों की टक्कर वाली संवेदनशील जगहों की पहचान की गई है और वन्यजीवों व राजमार्ग का इस्तेमाल करने वालों के लिए जोखिम को कम करने के लिए गति-नियंत्रण बोर्ड और साइनबोर्ड सहित जरुरी उपाय किए जाते हैं।
पारिस्थितिक संरक्षण के साथ अवसंरचना विकास का संतुलन
यह दस्तावेज़ संरक्षण समुदाय और राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना विकास में शामिल एजेंसियों के बीच सहयोग के महत्व पर भी ज़ोर देता है।
एनएचएआई द्वारा अपनाए गए दृष्टिकोण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सुरक्षा उपायों को राष्ट्रीय राजमार्ग विकास के विभिन्न चरणों में शामिल किया जाए, जिससे जैव विविधता संरक्षण और वैधानिक पर्यावरण अनुपालन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अवसंरचना का विस्तार किया जा सके। विस्तृत दस्तावेज़ एनएचएआई की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
हाल की पहलों और परियोजना कार्यान्वयनों को शामिल करते हुए, यह दस्तावेज़ राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना के विकास के लिए विभिन्न पर्यावरण संरक्षण उपायों को अपनाने की एनएचएआई की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह एक संदर्भ फ्रेमवर्क के रूप में कार्य करेगा, जिसमें राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में अपनाए जा रहे सुरक्षा उपायों और संरचनाओं का विवरण होगा।
यह पत्र सूचना कार्यालय (PIB) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति है, जिसे बिना बदलाव के प्रकाशित किया गया है।
