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बिज़नेस और अर्थव्यवस्था

केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली में विश्व बैंक समूह की ‘विश्व विकास रिपोर्ट 2026: आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस का वादा’ का विमोचन किया

रिपोर्ट विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस को अपनाने, अनुकूलन और आगे बढ़ाने के माध्यम से विकास के लिए इसका उपयोग करने हेतु एक रूपरेखा प्रस्तुत करती है
Union Minister Shri Ashwini Vaishnaw Launches World Bank Group’s ‘World Development Report 2026: The Promise of Artificial Intelligence’ in New Delhi
Photo: PIB

स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय (PIB), भारत सरकार — इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय · PIB Delhi · मूल विज्ञप्ति pib.gov.in पर पढ़ें

  • रिपोर्ट विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस को अपनाने, अनुकूलन और आगे बढ़ाने के माध्यम से विकास के लिए इसका उपयोग करने हेतु एक रूपरेखा प्रस्तुत करती है
  • इंडियाएआई मिशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और विश्व बैंक समूह ने संयुक्त रूप से भारत में इस विमोचन कार्यक्रम की मेजबानी की; नीति निर्माताओं, विकास विशेषज्ञों और प्रौद्योगिकी नेताओं ने समावेशी विकास के लिए आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस के विस्तार पर विचार-विमर्श किया
  • उच्च स्तरीय पैनल और राज्य स्तरीय एआई प्रदर्शनी में इस बात पर विचार किया गया कि भारत किस प्रकार पृथक एआई प्रायोगिक परियोजनाओं से साक्ष्य-आधारित व्यापक विस्तार की ओर बढ़ सकता है

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी, रेल एवं सूचना और प्रसारण मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज नई दिल्ली के ओबेरॉय होटल में आयोजित एक कार्यक्रम में विश्व बैंक समूह की विश्व विकास रिपोर्ट 2026: आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस का वादा नामक रिपोर्ट का विमोचन किया। यह रिपोर्ट विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस (एआई) द्वारा प्रस्तुत अवसरों और चुनौतियों का विश्लेषण करती है और देशों को एआई को अपनाने, अनुकूलित करने और आगे बढ़ाने के माध्यम से विकास के लिए इसका उपयोग करने हेतु एक रूपरेखा प्रस्तुत करती है।

भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के इंडियाएआई मिशन द्वारा विश्व बैंक समूह के सहयोग से इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इसमें वरिष्ठ नीति निर्माताओं, वैश्विक विकास विशेषज्ञों, प्रौद्योगिकी क्षेत्र के अग्रणी व्यक्तियों और विशेषज्ञों को एक साथ लाया गया ताकि इस बात पर विचार-विमर्श किया जा सके कि इंडिया एआई मिशन से प्राप्त विकास लाभों को कैसे अधिकतम और सुरक्षित रूप से बनाए रख सकता है। कार्यक्रम में एक राज्य स्तरीय एआई प्रदर्शन भी शामिल था, जिसमें राज्यों और नवप्रवर्तकों ने देश भर से एआई-सक्षम समाधान प्रस्तुत किए।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में विशेषज्ञता तक पहुंच बढ़ा सकता है, उत्पादकता बढ़ा सकता है और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार कर सकता है। एआई-सक्षम उपकरणों का उपयोग पहले से ही चिकित्सा जांच, कृषि संबंधी निर्णय लेने और शिक्षा में किया जा रहा है, जिससे दुर्लभ विशेषज्ञता आबादी के बड़े हिस्से तक पहुंच रही है। रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि ये लाभ मजबूत आधारों पर टिके हैं, जिनमें विश्वसनीय बिजली और कनेक्टिविटी, कंप्यूटिंग अवसंरचना, गुणवत्तापूर्ण डेटा, कौशल, शिक्षा प्रणाली और सक्षम संस्थान शामिल हैं।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने मुख्य भाषण दिया और औपचारिक रूप से रिपोर्ट प्रस्तुत की। केंद्रीय मंत्री ने प्रौद्योगिकी के लोकतंत्रीकरण के लिए भारत के दृष्टिकोण पर जोर दिया, ताकि आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस के लाभ देश भर के नागरिकों, उद्यमों और संस्थानों तक पहुंच सकें।

श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “एआई आम लोगों के जीवन को बदल रहा है। बारामती में, जिन किसानों ने कभी कंप्यूटर का इस्तेमाल नहीं किया, उन्होंने सिर्फ फोन पर आवाज के जरिए गन्ने की पैदावार में 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जबकि पानी और उर्वरक की खपत 30 प्रतिशत कम हुई। स्वास्थ्य सेवा में, टीबी का पता लगाने की दर में 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ऐसे उदाहरण विकासशील देशों और दुनिया भर में लोगों के जीवन को बदल सकते हैं।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बारामती की पहल में उपग्रह, आईओटी और मौसम संबंधी डेटा का उपयोग किया गया है और इससे श्रम लागत में भी कमी आई है। गुजरात में, एग्रीस्टैक का उपयोग 5 लाख किसान कर रहे हैं, और सरलाबेन के माध्यम से पशु स्वास्थ्य के लिए एआई का उपयोग 3 करोड़ पशुओं और उनके किसानों को लाभ पहुंचा रहा है।

भारत एआई के विकास और उपयोग के लिए एक महत्वपूर्ण इकोसिस्टम के रूप में उभरा है, जिसके अनुप्रयोग स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शिक्षा, सुशासन, वित्तीय सेवाओं और सार्वजनिक तथा आर्थिक महत्व के अन्य क्षेत्रों में हैं। भारत सरकार इंडियाएआई मिशन के माध्यम से सात स्तंभों पर एक व्यापक एआई इकोसिस्टम का निर्माण कर रही है: इंडियाएआई कंप्यूटिंग क्षमता, स्वदेशी आधारभूत मॉडलों के लिए इंडियाएआई नवाचार केंद्र, इंडियाएआई डेटासेट प्लेटफॉर्म (एआईकोश), इंडियाएआई अनुप्रयोग विकास पहल, इंडियाएआई फ्यूचरस्किल्स, इंडियाएआई स्टार्टअप वित्तपोषण और सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई।

इस मिशन का उद्देश्य एआई मूल्य श्रृंखला में भारत की क्षमताओं को मजबूत करना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि एआई विकास समावेशी, जिम्मेदार और भारत के विशाल आकार, विविधता और बहुभाषी संदर्भ के अनुकूल बना रहे। सरकार का दृष्टिकोण कंप्यूटिंग, डेटा और मॉडलों तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने, भारत-विशिष्ट चुनौतियों का समाधान करने और आर्थिक एवं रोजगार के अवसर सृजित करने पर केंद्रित है। सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई स्तंभ के तहत, सरकार जिम्मेदार एआई के लिए स्वदेशी उपकरणों और ढांचों के विकास का समर्थन कर रही है, जिसमें एआई पूर्वाग्रह शमन, एल्गोरिदम ऑडिटिंग, व्याख्या योग्य एआई, गोपनीयता-संरक्षण एआई और डीपफेक पहचान शामिल हैं और एआई सुशासन और सुरक्षा के लिए संस्थागत तंत्र स्थापित किए हैं।

भारत में इस पहल के शुभारंभ ने नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों को यह जांचने का मंच प्रदान किया कि सफल एआई प्रायोगिक परियोजनाओं की पहचान, मूल्यांकन और विस्तार कैसे किया जा सकता है ताकि मापने योग्य विकास परिणाम प्राप्त हो सकें और एआई से उत्पन्न जोखिमों से कैसे बचाव किया जा सके।

कार्यक्रम का शुभारंभ इंडियाएआई मिशन के मुख्य परिचालन अधिकारी और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्यिगिकी मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री सुदीप श्रीवास्तव और विश्व बैंक समूह के विकास अर्थशास्त्र और रणनीति निदेशक डॉ. सोमिक लाल के स्वागत भाषणों से हुआ।

डॉ. सोमिक लाल ने कहा, “विश्व विकास रिपोर्ट का एक प्रमुख संदेश आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस के निर्माण के बारे में नहीं, बल्कि उसके उपयोग के बारे में है। भारत के पास संस्थानों, बाजारों और एआई को एक साथ लाकर लाखों लोगों के जीवन को बदलने का एक अनूठा अवसर है।”

विश्व बैंक समूह के मुख्य अर्थशास्त्री और वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. माइकल क्रेमर ने “एआई प्रायोगिक परियोजनाओं से विस्तार तक: भारत में एआई का वादा” विषय पर मुख्य भाषण देते हुए इस बात पर प्रकाश डाला कि एआई के क्षेत्र में भारत की प्रगति से व्यापक विकासशील देशों को सीख मिलती है। उन्होंने कहा, “एआई के क्षेत्र में भारत की विशाल प्रगति न केवल अपनी समस्याओं का समाधान कर रही है, बल्कि विश्व के लिए व्यापक विकास चुनौतियों का भी समाधान कर रही है।”

आंध्र प्रदेश में किसानों के लिए मौसम संबंधी सलाह और एडटेक समाधानों के उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, “एआई समाधानों के व्यापक विस्तार के लिए हमें एक संपूर्ण दृष्टिकोण की, न केवल सॉफ्टवेयर के तत्व बल्कि इसके साथ जुड़े मानवीय और संस्थागत तत्व की भी की आवश्यकता है।”

डॉ. क्रेमर ने भारत के एआई-आधारित मानसून पूर्वानुमान को विश्व के लिए एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। भारत सरकार ने अपने मौसम विज्ञान एजेंसियों और कृषि मंत्रालय के माध्यम से, खुले तौर पर उपलब्ध मॉडलों सहित कई एआई मॉडलों का परीक्षण और संयोजन किया और पाठ, आवाज तथा एआई-संचालित सलाहों के माध्यम से लाखों किसानों को पूर्वानुमान उपलब्ध कराए। इस मॉडल ने वर्ष 2025 के असामान्य मानसून की भविष्यवाणी की थी और अब इथियोपिया भी भारत का अनुसरण कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह मामला दर्शाता है कि जहां व्यावसायिक प्रोत्साहन कमजोर हैं लेकिन सामाजिक क्षमता अधिक है, वहां सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

इसके बाद विश्व विकास रिपोर्ट 2026 के निदेशक डॉ. गौरव नैयर ने रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्षों को प्रस्तुत किया।

डॉ. नैयर ने कहा, “भारत पहले से ही विकास के लिए आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस (एआई) के मार्ग पर अग्रसर है, स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उपकरणों को अपनाकर और सरकार इस नई तकनीक के प्रवर्तक, उपयोगकर्ता और नियामक की भूमिका निभा रही है। एआई भारत जैसे विकासशील देशों के लिए दशकों में उन समस्याओं को हल कर सकता है, जो एक सदी में भी हल नहीं हो सकीं।”

प्रस्तुति में विकासशील देशों के लिए रिपोर्ट के मुख्य संदेश: आशावादी बनें, रणनीतिक बनें और व्यावहारिक बनें, प्रस्तुत किए गए। देशों को एआई को अपनाना और उसमें बदलाव लाना चाहिए, फिर प्रगति करनी चाहिए; अरबों डॉलर खर्च करके उन्नत प्रणालियाँ बनाने के बजाय एआई उपकरणों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल ढालने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए; और एआई के प्रवर्तक, उपयोगकर्ता और नियामक के रूप में लागत-सचेत विकल्प चुनने चाहिए। इसमें यह भी बताया गया कि विकासशील देशों में रोजगार व्यवधान का खतरा उतना निकट नहीं है, और एआई से सबसे अधिक लाभ उठाने वाले देश शायद सबसे कम तैयार हैं, क्योंकि विश्व के 25 निम्न-आय वाले देशों में से केवल एक ने ही राष्ट्रीय एआई रणनीति प्रकाशित की है।

विश्व बैंक समूह के कार्यकारी निदेशक श्री नीलकंठ मिश्रा और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव श्री एस. कृष्णन ने विशेष रूप से संबोधित किया।

श्री एस. कृष्णन ने कहा, “विश्व विकास रिपोर्ट भारत की एआई रूपरेखा (कंप्यूटिंग, डेटा और मॉडल) के साथ पूरी तरह से मेल खाती है और विनियमन: मौजूदा कानूनों और स्वैच्छिक अनुपालन पर भरोसा करना और प्रौद्योगिकी के विकास के साथ-साथ विनियमन की समीक्षा करने के लिए एक व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।”

श्री कृष्णन ने कहा कि मानवीय क्षमताएं सबसे अधिक मायने रखती हैं और प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप, एआई प्रतिभा मिशन पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि विश्व में एआई कौशल के उच्चतम प्रसार वाले देशों में से एक होने के नाते, भारत विकासशील देसों का समर्थन कर सकता है, जबकि घरेलू स्तर पर उद्यम स्तर पर एआई को अपनाने का विस्तार होना चाहिए और सरकार को चुस्त और अनुकूल बने रहना चाहिए।

इसके बाद “भारत में विकास के लिए एआई का उपयोग” विषय पर एक उच्च स्तरीय पैनल चर्चा हुई। इसमें तीन प्रश्नों: भारत में एआई को अपनाने की चुनौतियां, भारत एआई का लाभ कैसे उठा सकता है और इसे स्थानीय संदर्भों और आवश्यकताओं के अनुरूप कैसे ढाल सकता है, और एआई से उत्पन्न जोखिमों को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक नीतियां पर विचार किया गया। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस के लाभों को साकार करने के लिए ऐसी नीतियों की आवश्यकता होगी जो यह सुनिश्चित करें कि इसके लाभ व्यापक रूप से साझा किए जाएं और इसके जोखिमों को सख्ती से नियंत्रित किया जाए।

इस पैनल में विश्व बैंक समूह के कार्यकारी निदेशक श्री नीलकंठ मिश्रा, विश्व बैंक समूह के विकास अर्थशास्त्र रणनीति निदेशक डॉ. सोमिक लाल, सर्वम एआई के सह-संस्थापक डॉ. विवेक राघवन, वधवानी एआई के मुख्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ. नीरज अग्रवाल, भारतजेन के उपाध्यक्ष श्री मनीष सिंह और एकस्टेप फाउंडेशन के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री शंकर मरुवाड़ा शामिल थे। सत्र का संचालन सीएनबीसी-टीवी18 की प्रबंध संपादक सुश्री शेरीन भान ने किया। पैनलिस्टों ने कुछ् प्रायोगिक परियोजनाओं से आगे बढ़कर साक्ष्य-आधारित विस्तार, स्थानीय क्षमताओं को मजबूत करने, डेटा और कंप्यूटिंग तक पहुंच में सुधार करने, उपयुक्त संस्थागत ढांचे स्थापित करने और भारत के विविध सामाजिक और आर्थिक संदर्भों के अनुरूप एआई समाधानों को प्रासंगिक बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।

पैनल चर्चा के बाद “भारत भर से एआई नवाचार” विषय पर राज्य एआई प्रदर्शन हुआ, जिसमें अखिल भारतीय परिप्रेक्ष्य से यह दिखाया गया कि कैसे राज्य स्थानीय और विकास संबंधी चुनौतियों का समाधान करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में स्केलेबल एआई अनुप्रयोगों का उपयोग कर रहे हैं। प्रत्येक प्रस्तुतकर्ता ने एक प्रमुख एआई-सक्षम समाधान, उसके कार्यान्वयन की प्रक्रिया और उसके मापने योग्य प्रभाव पर प्रकाश डाला। प्रस्तुतियाँ इस प्रकार थीं:

  • नवचेतना, 0 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों में विकासात्मक विलंब का पता लगाने के लिए एक एआई-सक्षम प्रारंभिक स्क्रीनिंग पहल प्रस्तुत की गई। इसे आंध्र प्रदेश के महिला विकास एवं बाल कल्याण विभाग के निदेशक श्री एम. वेणुगोपाल रेड्डी द्वारा प्रस्तुत किया गया;
  • महाविस्तार एआई, व्यक्तिगत सलाह, डिजिटल सेवाओं और किसान सहभागिता के लिए एक कनेक्टेड प्लेटफॉर्म की प्रस्तुति दी गई। इसे महाराष्ट्र के पीओसीआरए प्रोजेक्ट के श्री फहीम शेख ने प्रस्तुत किया;
  • एडस्कग्रिड, शिक्षा के लिए एक जियोएआई गवर्नेंस इंटेलिजेंस समाधान की प्रस्तुति की गई, जिसे मेघालय की राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा अभियान और स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता निदेशक सुश्री ऋचा कुलकर्णी ने प्रस्तुत किया;
  • व्यूहा–सर्विआई, पॉइंट ऑफ केयर के लिए एक सर्विकल कैंसर स्क्रीनिंग समाधान प्रस्तुत किया गया, जिसे एनसीजी कैच ग्रांट के विजेता, व्यूहा मेड डेटा के सह-संस्थापक और सीईओ श्री धृतिमान मल्लिक ने प्रस्तुत किया;

इस प्रदर्शनी में विभिन्न दृष्टिकोणों, उभरते मॉडलों और भौगोलिक क्षेत्रों में अनुकूलन की क्षमता रखने वाले समाधानों पर प्रकाश डाला गया।

विचार-विमर्श में एआई में जनविश्वास बढ़ाने और यह सुनिश्चित करने के महत्व पर बल दिया गया कि प्रौद्योगिकी का विकास सुरक्षित, जिम्मेदार और समावेशी तरीके से हो। भारत द्वारा विश्व विकास रिपोर्ट 2026: आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस का वादा का शुभारंभ, विकास के प्रवर्तक के रूप में एआई का उपयोग करने पर वैश्विक संवाद में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और देशों के लिए एआई में हुई प्रगति को व्यापक और सतत विकास परिणामों में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक मूलभूत क्षमताओं, संस्थानों और नीतिगत ढाँचों के निर्माण की आवश्यकता का उल्लेख करता है।

कार्यक्रम का समापन श्री मोहम्मद वाई. सफिरुल्ला के., आईएएस, निदेशक, इंडियाएआई मिशन के समापन भाषण के साथ हुआ।

यह पत्र सूचना कार्यालय (PIB) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति है, जिसे बिना बदलाव के प्रकाशित किया गया है।

स्रोत

यह पत्र सूचना कार्यालय (PIB), भारत सरकार द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति है — इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय, PIB Delhi. PIB की कॉपीराइट नीति के अनुसार इसे बिना बदलाव के प्रकाशित किया गया है।

मूल विज्ञप्ति देखें
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