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जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल ने गंगा संरक्षण संबंधी अधिकार प्राप्त कार्यबल की 20वीं बैठक की अध्यक्षता की

जल पर विभागीय शिखर सम्मेलन के दौरान शिक्षा में जल को शामिल करने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विज़न को उजागर करते श्री सी.आर. पाटिल ने 20वीं ईटीएफ बैठक…
Jal Shakti Minister Shri C.R. Paatil chairs 20th Meeting of Empowered Task Force on Ganga Rejuvenation
Photo: PIB

स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय (PIB), भारत सरकार — जल शक्ति मंत्रालय · PIB Delhi · मूल विज्ञप्ति pib.gov.in पर पढ़ें

  • जल पर विभागीय शिखर सम्मेलन के दौरान शिक्षा में जल को शामिल करने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विज़न को उजागर करते श्री सी.आर. पाटिल ने 20वीं ईटीएफ बैठक में इस विज़न को आगे बढ़ाया; स्कूलों में जल-संबंधी पाठ्यक्रम, इंजीनियरिंग और तकनीकी विश्वविद्यालयों में जल-विशिष्ट विषय और उच्च शिक्षण संस्थानों में जल प्रबंधन और प्रशासन पाठ्यक्रम अनिवार्य किए गए

नदी संरक्षण के प्रति सरकार की समग्र प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल की अध्यक्षता में गंगा संरक्षण पर अधिकार प्राप्त कार्य बल (ईटीएफ) की 20वीं बैठक नई दिल्ली में आयोजित की गई। इस बैठक में नमामि गंगा कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा की गई और नदी संरक्षण में तेजी लाने के उद्देश्य से प्रमुख उपायों पर विचार-विमर्श किया गया। इन उपायों में बेहतर सीवरेज अवसंरचना, वैज्ञानिक जल प्रबंधन, उपचारित अपशिष्ट जल का सुरक्षित पुनर्उपयोग, पारिस्थितिकीय पुनर्स्थापना, भूजल प्रबंधन, प्रकृति-आधारित समाधान और हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय शामिल हैं।

इस बैठक में जल शक्ति राज्य मंत्री श्री राज भूषण चौधरी के साथ-साथ विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों के प्रमुख हितधारक भी शामिल हुए। इनमें जल संसाधन विभाग में सचिव श्रीमती अर्चना वर्मा; पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में सचिव श्री अशोक के.के. मीना; स्वच्छ गंगा राष्ट्रीय मिशन (एनएमसीजी) के महानिदेशक श्री राजीव कुमार मित्तल; जल संसाधन विभाग के जेएस एवं एफए श्री गौरव मसालदान; और एनएमसीजी तथा भागीदार राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

बैठक में सीवेज अवसंरचना की स्थिति, डीपीआर तैयार करने और मूल्यांकन, भूमि की उपलब्धता, उपचारित अपशिष्ट जल के सुरक्षित पुन: उपयोग (एसआरटीडब्ल्यू), जलभंडार मानचित्रण, आर्द्रभूमि, नगर स्वच्छता कार्य योजना (सीएसएपी), हवाई जल निकासी मानचित्रण और राज्य गंगा समितियों की नियमित बैठकों की समीक्षा की गई। यह बताया गया कि बरौनी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के लिए संशोधित डीपीआर प्राप्त हो गया है और मूल्यांकन के लिए आईआईटी-बीएचयू को भेज दिया गया है, जबकि पश्चिम बंगाल के शांतिपुर एसटीपी के लिए डीपीआर को कार्यकारी समिति द्वारा अनुमोदित कर दिया गया है। बिहार और पश्चिम बंगाल ने उपचारित अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग पर अपनी नीतियां अधिसूचित कर दी हैं, जबकि झारखंड राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी प्राप्त करने की प्रक्रिया में है।

इस बैठक में नमामि गंगा कार्यक्रम के अंतर्गत परियोजनाओं की समग्र स्थिति और वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान इस कार्यक्रम के प्रदर्शन की समीक्षा की गई। अगस्त 2026 तक, कुल  43,266 करोड़ रुपये की लागत से 527 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें से 368 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। सीवरेज अवसंरचना के अंतर्गत, 219 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनसे 6,603 एमएलडी की उपचार क्षमता और 5,245 किलोमीटर का सीवर नेटवर्क निर्मित हुआ है। इनमें से 147 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जिनसे 4,339 एमएलडी की सीवेज उपचार क्षमता और 4,615 किलोमीटर का सीवर नेटवर्क निर्मित हुआ है। नमामि गंगा कार्यक्रम में जैव उपचार और नवीन सीवेज उपचार, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, औद्योगिक अपशिष्ट उपचार, निगरानी और पर्यवेक्षण, अनुसंधान एवं विकास, जैव विविधता एवं वृक्षारोपण, आजीविका सृजन, जन जागरूकता और ज्ञान प्रबंधन से संबंधित कार्यक्रम भी शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री ने कार्यान्वयन की गति बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया और संबंधित एजेंसियों तथा राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे चल रही परियोजनाओं को समय पर पूरा करना और लंबित डीपीआर, भूमि संबंधी मुद्दों और अन्य कार्यान्वयन संबंधी बाधाओं पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें।

इस बैठक में रिवर सिटी गठबंधन के अंतर्गत विकसित शैक्षणिक पाठ्यक्रमों की भी समीक्षा की गई, जो जल संबंधी पाठ्यक्रमों को विकसित करने और उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में जल शासन एवं प्रबंधन को शामिल करने की दिशा के अनुरूप हैं। एनएमसीजी और एनआईयूए ने दो पाठ्यक्रम – शहरी नदी प्रबंधन के सिद्धांत और पर्यावरण अनुकूल तटवर्ती विकास तैयार किए और उसे संचालित किए हैं। पहला पाठ्यक्रम मित्राज सर्वजनिक विश्वविद्यालय (पूर्व में एससीईटी सूरत) और ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में पढ़ाया जा रहा है, जबकि दूसरा पाठ्यक्रम स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, भोपाल में पढ़ाया जा रहा है। इन पाठ्यक्रमों में जलसंभर, जल निकासी बेसिन, नदी संरचना, वर्षा जल प्रबंधन, पर्यावरणीय प्रवाह, पर्यावरण अनुकूल नदी तट डिजाइन, बेसिन-शहर संबंध, बाढ़ क्षेत्र विनियमन, नदी तट पारिस्थितिकी, जल संवेदनशील शहरी डिजाइन और जलवायु अनुकूलन जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु उत्तर प्रदेश के पीलीभीत स्थित गोमती उद्गम स्थल का संरक्षण था। गोमती उद्गम स्थल को फिर से दुरूस्त करने एवं एकीकृत विकास के लिए मास्टर प्लान को दिसंबर 2025 में आयोजित एनएमसीजी की 68वीं कार्यकारी समिति की बैठक में अनुमोदित किया गया था। बैठक में यह जानकारी दी गई कि झील के जीर्णोद्धार और 1 एमएलडी प्राकृतिक समाधान आधारित एसटीपी के माध्यम से सीवेज उपचार से संबंधित डीपीआर को 17 सितंबर 2026 को प्रशासनिक स्वीकृति और व्यय स्वीकृति के साथ अनुमोदित कर दिया गया है। कछुआ आवास और पंचवाटिका के जीर्णोद्धार से संबंधित डीपीआर पर 74वीं कार्यकारी समिति में विचार किया जा रहा है, जबकि अवसंरचना विकास से संबंधित डीपीआर की जांच चल रही है। केंद्रीय मंत्री ने सलाह दी कि अनुमोदित उपायों का कार्यान्वयन बिना विलंब के शुरू किया जाए और निविदा प्रक्रिया को समय पर पूरा करने तथा राज्य स्तरीय संचालन समिति के गठन की आवश्यकता पर बल दिया।

इस बैठक में बिहार में निरंजना/फल्गु नदी के प्रस्तावित पुनरुद्धार की भी समीक्षा की गई, जिसमें नदी परितंत्र में सुधार लाने और वनरोपण, भूजल पुनर्भरण और पुनर्भरण खाइयों जैसे उपायों के माध्यम से जल उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से हस्तक्षेप शामिल हैं। बिहार सरकार के मुख्य सचिव को जारी पत्र के बाद, बिहार के जल संसाधन विभाग में सचिव को निरंजना पुनरुद्धार पहल के लिए राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी नामित किया गया है। एनएमसीजी ने राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी से अनुरोध किया है कि वे सभी संबंधित राज्य विभागों के परामर्श से मात्रा बिल (बीओक्यू) और विस्तृत लागत अनुमानों की जांच और पुष्टि करें, जिसमें नवीनतम लागू दर अनुसूची (एसओआर) के अनुसार मात्रा, मदों और दरों का सत्यापन शामिल है। राज्य से अनुरोध किया गया है कि परियोजना की आगे की मंजूरी और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को सुगम बनाने के लिए जल्द से जल्द पुष्टि प्रस्तुत करें। श्री सी.आर. पाटिल ने नदी संरक्षण के लिए एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने के महत्व पर जोर दिया। इसमें पारिस्थितिक पुनर्स्थापन को भूजल प्रबंधन और जल उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से उपायों के साथ जोड़ा जाए।

बैठक में यमुना नदी के संरक्षण के लिए एनएमसीजी से संबंधित पहलों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। उत्तर प्रदेश में, एनएमसीजी ने मथुरा-वृंदावन, कोसी-छट्टा, आगरा, फिरोजाबाद और इटावा में परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनका उद्देश्य सीवेज संग्रहण, परिवहन, उपचार और प्रबंधन बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और यमुना तथा उससे जुड़ी जलधाराओं में अनुपचारित या अपर्याप्त रूप से उपचारित सीवेज के निर्वहन को कम करना है। दिल्ली में, अपशिष्ट जल प्रबंधन पहलों के अलावा, यमुना पारिस्थितिक कार्य बल का गठन, आर्द्रभूमि से संबंधित पहल, दिल्ली के लिए शहरी नदी प्रबंधन योजना की तैयारी, नालियों का ड्रोन-आधारित सर्वेक्षण, प्रकृति-आधारित समाधान, प्रदूषण से संबंधित प्रवाह की निगरानी, ​​अत्यधिक प्रदूषणकारी उद्योग और इंटरसेप्टर सीवरेज परियोजना शामिल हैं। इसके अलावा, कोरोनेशन स्तंभ और ओखला एसटीपी के माध्यम से यमुना नदी में पर्यावरणीय प्रवाह को बढ़ाना भी शामिल है।

केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इस प्रकार की शैक्षणिक पहल नदी प्रबंधन के पारिस्थितिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और नीतिगत आयामों को दुरूस्त करने में सक्षम ज्ञान का मजबूत आधार और पेशेवरों का एक समूह तैयार करने में योगदान दे सकती हैं। यह भी बताया गया कि नदी प्रबंधन पेशेवरों और छात्रों के लिए इन पाठ्यक्रमों को शहर और राज्य स्तर पर बढ़ावा दिया जा सकता है, और इन पाठ्यक्रमों को पूरा करने वाले छात्रों को शहरों में नदी संबंधी कार्यों के लिए विचार किया जा सकता है।

इस बैठक में 19वीं ईटीएफ बैठक के बाद से शुरू की गई प्रमुख जनसंपर्क और जनभागीदारी पहलों की समीक्षा भी की गई। स्वच्छता ही सेवा 2026 के तहत विभिन्न स्थानों पर स्वच्छता अभियान, जागरूकता अभियान और सामुदायिक सहभागिता गतिविधियां चलाई गईं। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने देश भर के जल संरक्षण और नदी संरक्षण कार्यकर्ताओं से भी बातचीत की और जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, नदी संरक्षण और सामुदायिक लामबंदी की दिशा में उनके जमीनी प्रयासों को सराहा। केंद्रीय मंत्री ने इन जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के योगदान की प्रशंसा की और इस बात पर जोर दिया कि नदी संरक्षण प्रयासों को दीर्घकालिक और समुदाय-नेतृत्व वाली कार्रवाई में बदलने के लिए निरंतर और लक्षित जनभागीदारी आवश्यक है।

इस बैठक में जुलाई और अगस्त 2026 के दौरान नई दिल्ली, पुणे और गुवाहाटी में आयोजित लघु नदी संरक्षण रूपरेखा पर राष्ट्रीय स्तर की परामर्श कार्यशालाओं की समीक्षा की गई, जिनमें वैज्ञानिक योजना, प्रकृति-आधारित समाधान, भूजल पुनर्भरण, पर्यावरणीय प्रवाह और सामुदायिक भागीदारी पर ध्यान केंद्रित किया गया था। इन कार्यशालाओं का उद्देश्य स्थानीय पारिस्थितिक स्थितियों और सामुदायिक ज्ञान को शामिल करते हुए लघु नदियों और जलमार्गों के पुनर्जीवन के लिए एक व्यवस्थित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मजबूत करना था।

नौवें भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह 2026 के दौरान, सतत शहरी नदी प्रबंधन (एसयूआरएम) ढांचा और नदी में सूक्ष्म प्लास्टिक की निगरानी के लिए प्रोटोकॉल भी लॉन्च/जारी किए गए, ताकि सतत नदी-शहर प्रबंधन और नदी प्रदूषण की वैज्ञानिक निगरानी को मजबूत किया जा सके। इन पहलों का उद्देश्य शहरों और नदी प्राधिकरणों को शहरी नदी प्रबंधन के लिए सतत दृष्टिकोण अपनाने और नदी में सूक्ष्म प्लास्टिक सहित उभरती प्रदूषण चुनौतियों की वैज्ञानिक निगरानी को मजबूत करने में सहायता करना है।

विश्व नदी दिवस के अवसर पर, 137 सीईटीएफ बटालियन (टीए) के 39वें गंगा कार्यबल ने प्रयागराज, वाराणसी, कानपुर, लखनऊ और दिल्ली के प्रमुख नदी तटीय क्षेत्रों में जागरूकता अभियान और स्वच्छता अभियान चलाए, जिससे नदी संरक्षण में जनभागीदारी को और मजबूती मिली। अधिकार प्राप्त कार्यबल की 20वीं बैठक में नदी संरक्षण के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, शहरी स्थानीय निकायों, वैज्ञानिक संस्थानों और स्थानीय समुदायों के बीच लगातार समन्वय के महत्व पर जोर दिया गया।

श्री सी.आर. पाटिल ने इस बात पर जोर दिया कि नदी के संरक्षण के लिए एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है जो प्रदूषण नियंत्रण से परे जाकर जल उपलब्धता, पारिस्थितिक स्वास्थ्य, भूजल सुरक्षा, जैव विविधता संरक्षण, सतत शहरी विकास और सामुदायिक भागीदारी को समाहित करे। उन्होंने जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम सुनिश्चित करने के लिए सभी स्तरों पर निरंतर समन्वय और गहन निगरानी का आह्वान किया।

गंगा संरक्षण पर अधिकार प्राप्त कार्य बल की 20वीं बैठक में इस बात को दोहराया गया कि गंगा बेसिन में निरंतर और समन्वित प्रयास अविरल और निर्मल गंगा की परिकल्पना को मजबूत करने के साथ-साथ नदी बेसिन में दीर्घकालिक जल सुरक्षा, पारिस्थितिक लचीलापन और सतत विकास को आगे बढ़ाने के लिए केंद्रीय बने रहेंगे।

यह पत्र सूचना कार्यालय (PIB) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति है, जिसे बिना बदलाव के प्रकाशित किया गया है।

स्रोत

यह पत्र सूचना कार्यालय (PIB), भारत सरकार द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति है — जल शक्ति मंत्रालय, PIB Delhi. PIB की कॉपीराइट नीति के अनुसार इसे बिना बदलाव के प्रकाशित किया गया है।

मूल विज्ञप्ति देखें
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