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- महाराष्ट्र में प्याज का औसत मंडी भाव 13 प्रतिशत तक गिरा
- 126 शहरों में दो हफ्तों में खुदरा दाम ₹1 से ₹21 प्रति किलो घटे
- कांदा एक्सप्रेस और 467 ट्रकों से 123 शहरों में बफर प्याज पहुंचाया गया
- अब तक 2 लाख क्विंटल से अधिक प्याज की आपूर्ति हुई
- खरीफ प्याज का रकबा करीब 5 प्रतिशत ज्यादा रहने का अनुमान
देश में नई खरीफ प्याज की आवक बढ़ने से मंडियों और खुदरा बाजारों में दाम नीचे आ रहे हैं। सरकार भी बफर स्टॉक से प्याज निकालकर आपूर्ति बढ़ा रही है।
मंडी और खुदरा बाजार में गिरावट
महाराष्ट्र में प्याज का भारित औसत मंडी भाव 16 सितंबर को लगभग ₹4,030 प्रति क्विंटल था। 3 अक्टूबर तक यह घटकर करीब ₹3,475 प्रति क्विंटल रह गया, यानी लगभग 13 प्रतिशत की गिरावट।
पिछले दो हफ्तों में 126 शहरों में प्याज के खुदरा दाम ₹1 से ₹21 प्रति किलोग्राम तक घटे हैं। तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे ज्यादा खपत वाले राज्यों में भी दाम नीचे आए हैं।
यह गिरावट कुछ मंडियों या इलाकों तक सीमित नहीं है। इससे देशभर में प्याज की उपलब्धता बेहतर होने का संकेत मिलता है।
खरीफ फसल और नई आवक
कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और राजस्थान जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों से खरीफ की नई प्याज की आवक शुरू हो गई है। मंडियों की मांग अभी भंडारित स्टॉक से भी पूरी की जा रही है।
पूरे देश में खरीफ प्याज का रकबा पिछले साल के ऊंचे स्तर से करीब 5 प्रतिशत ज्यादा रहने का अनुमान है। प्रमुख क्षेत्रों में फसल की हालत भी अच्छी बताई गई है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार कटाई के समय खरीफ प्याज के प्रमुख क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश की संभावना नहीं है। इससे कटाई, सुखाने और ढुलाई आसान रहेगी, और नमी से फसल खराब होने का खतरा भी घटेगा।
बफर स्टॉक से सप्लाई बढ़ाई
सरकार बफर स्टॉक से प्याज जारी कर उपभोग केंद्रों तक आपूर्ति बढ़ा रही है। अब तक 123 शहरों में 8 ‘कांदा एक्सप्रेस’ और 467 ट्रकों के जरिए 2 लाख क्विंटल से अधिक प्याज पहुंचाया गया है।
त्योहारी सीजन को देखते हुए सरकार अतिरिक्त रेल रैक लगाने की योजना बना रही है। इससे ज्यादा खपत वाले बाजारों तक अधिक प्याज पहुंच सकेगा। आपूर्ति की रफ्तार और कुशलता बढ़ाने के लिए और ट्रेनें चलाने की योजना भी है।
सरकार आवक, स्टॉक और दामों के उतार-चढ़ाव पर नजर रख रही है। जहां जरूरत होगी, वहां व्यवस्थित वितरण और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के कदम उठाए जाएंगे।
आने वाले हफ्तों में नई फसल की आवक और बढ़ने तथा सरकारी वितरण मजबूत होने से दाम और घटने की उम्मीद है।
