લાઇવ रविवार, 11 अक्टूबर 2026
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4,000 साल पुरानी ढोकरा कला से लेकर जनजातीय विरासत तक, प्रधानमंत्री को मिले स्मृति चिन्हों की 8वीं इ-नीलामी में जीवंत हुई छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक गाथा

यह संग्रह छत्तीसगढ़ की प्राचीन धातु-ढलाई परंपराओं, जनजातीय विरासत, भक्ति कला और समकालीन सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित करता है
4,000 साल पुरानी ढोकरा कला से लेकर जनजातीय विरासत तक, प्रधानमंत्री को मिले स्मृति चिन्हों की 8वीं इ-नीलामी में जीवंत हुई छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक गाथा
પ્રતીકાત્મક તસવીર

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स्रोत: पत्र सूचना कार्यालय (PIB), भारत सरकार — संस्‍कृति मंत्रालय · PIB Delhi · मूल विज्ञप्ति pib.gov.in पर पढ़ें

  • यह संग्रह छत्तीसगढ़ की प्राचीन धातु-ढलाई परंपराओं, जनजातीय विरासत, भक्ति कला और समकालीन सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित करता है
  • इस नीलामी में प्रधानमंत्री को मिले स्मृति चिन्हों के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से बोली लगा सकते हैं

छत्तीसगढ़ के 16 स्मृति चिन्हों के संग्रह में एक प्राचीन धातु-ढलाई परंपरा मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी हुई है, जो राज्य की समृद्ध जनजातीय विरासत, भक्ति परंपराओं और समकालीन सांस्कृतिक पहचान को एक साथ प्रस्तुत करती है।

इस संग्रह के केंद्र में ढोकरा कला है, जो भारत में 4,000 से अधिक वर्षों से चली आ रही एक पारंपरिक ‘लॉस्ट-वैक्स’ (मोम-पिघलाकर ढलाई करने की) धातु-ढलाई शिल्प है। ढोकरा की कई कृतियाँ इस परंपरा के विशिष्ट चरित्र और बहुमुखी प्रतिभा को प्रदर्शित करती हैं, जिनमें हाथी के सिर वाले नंदी, खड़े हुए नंदी और माड़िया-माड़िन जनजातीय जोड़े की प्रतिमा शामिल हैं।

जनजातीय छत्तीसगढ़ की यह कहानी आगे एक पारंपरिक अनुष्ठानिक पगड़ी के माध्यम से जारी रहती है, जिसमें मयूर पंखों का गुच्छा, कौड़ियां, धातु की चकती और पीतल की घंटियां लगी हुई हैं।

जनजातीय शिल्प के अलावा, यह संग्रह राज्य को आकार देने वाले कई सांस्कृतिक प्रभावों को भी एक साथ लाता है। “राम राम” के मंत्र से ढका रामनामी समाज का एक स्टोल, आस्था और भक्ति की एक अनूठी अभिव्यक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। अन्य स्मृति चिन्ह महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को दर्शाते हैं, जिनमें हाटकेश्वर महादेव, बुढ़ेश्वर महादेव, जय मां कुदरगढ़ी और मधेश्वर महादेव शामिल हैं।

यह संग्रह समकालीन छत्तीसगढ़ की झलक भी पेश करता है। ‘महतारी वंदन योजना’ को दर्शाती एक वुडकट (लकड़ी की नक्काशीदार) पट्टी, ‘छत्तीसगढ़ विधानसभा की रजत जयंती’ का प्रतीक एक स्मृति चिन्ह और ‘नवा रायपुर’ के संस्थानों को दर्शाने वाले मॉडल राज्य की पारंपरिक विरासत के साथ-साथ इसके निरंतर बदलते वर्तमान को भी प्रदर्शित करते हैं।

इस संग्रह का मुख्य संदेश निरंतरता है। पीढ़ियों से आकार लेती आ रही परंपराएं आज भी समकालीन कृतियों में झलकती हैं और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक स्मृतियों को आगे बढ़ा रही हैं।

यह नीलामी फिलहाल जारी है और इसकी अंतिम तिथि को 31 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दिया गया है। नीलामी से प्राप्त राशि का उपयोग ‘नमामि गंगे परियोजना’ सहायता में किया जाएगा।

इच्छुक बोलीदाता आधिकारिक ‘पीएम मेमेंटोस ई-ऑक्शन पोर्टल’ के माध्यम से ऑनलाइन बोली लगा सकते हैं: https://pmmementos.gov.in

यह पत्र सूचना कार्यालय (PIB) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति है, जिसे बिना बदलाव के प्रकाशित किया गया है।

સ્રોત

ભારત સરકારના પત્ર સૂચના કાર્યાલય (PIB)ની સત્તાવાર અખબારી યાદી — संस्‍कृति मंत्रालय, PIB Delhi. PIBની કૉપિરાઇટ નીતિ મુજબ, આભાર સાથે, કોઈ ફેરફાર વગર પ્રકાશિત.

મૂળ યાદી જુઓ
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