લાઇવ सोमवार, 12 अक्टूबर 2026
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સહકાર પર મંથન: 9મી રાષ્ટ્રીય સમીક્ષા કાર્યશાળા બસ્તરમાં શરૂ થઈ

બે દિવસીય વર્કશોપમાં આગામી ત્રણ મહિનાનો એક્શન પ્લાન નક્કી કરવામાં આવશે. સહકારી બેંકોની દેખરેખ અને PACS ને બજાર સાથે જોડવાની પણ ચર્ચા કરવામાં આવશે.
सहकारिता पर मंथन: बस्तर में 9वीं राष्ट्रीय समीक्षा कार्यशाला शुरू
પ્રતીકાત્મક તસવીર

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  • 8 और 9 अक्टूबर 2026 को छत्तीसगढ़ के बस्तर में दो दिवसीय कार्यशाला होगी
  • सहकारी बैंकों की स्वायत्तता के साथ जवाबदेही और प्रभावी निगरानी जरूरी: आशीष कुमार भूटानी
  • NCDC अधिनियम संशोधन से सहकारी विकास से जुड़ी अन्य संस्थाओं को भी वित्तीय सहायता मिलेगी
  • साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ONDC ने सहयोग की पेशकश की है
  • PACS को राज्य और राष्ट्रीय सहकारी संघों से जोड़ने पर जोर दिया गया

छत्तीसगढ़ के बस्तर में 9वीं राष्ट्रीय समीक्षा कार्यशाला शुरू हो गई है। सहकारिता मंत्रालय यह कार्यशाला 8 और 9 अक्टूबर 2026 को कर रहा है। इसका विषय ‘सहकार से समृद्धि — आगे की राह: सहकारिता रूपांतरण से व्यापक प्रभाव की ओर’ है।

कार्यशाला का मकसद प्रमुख पहलों की प्रगति की समीक्षा करना है। राज्यों के सफल तरीके और जमीनी अनुभव भी साझा किए जाएंगे। आगामी तीन महीनों के लिए नतीजे देने वाली कार्ययोजना बनाई जाएगी।

कार्यशाला में राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, सहकारिता पंजीयक, राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं और संघों के प्रतिनिधि और अन्य हितधारक हिस्सा ले रहे हैं। पुनरुद्धार, वित्तीय मजबूती, डिजिटलीकरण और बाजार तक पहुंच जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

सहकारी बैंकों की निगरानी पर जोर

सहकारिता मंत्रालय के सचिव आशीष कुमार भूटानी ने उद्घाटन सत्र में बात रखी। उन्होंने बताया कि बस्तर में कार्यशाला का सुझाव केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने दिया था। लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहे इस जिले में यह पहल अहम मानी जा रही है।

भूटानी ने सहकारी बैंकों की स्वायत्तता के साथ जवाबदेही और सख्त निगरानी की बात कही। उन्होंने सभी राज्यों के सहकारिता पंजीयकों से अधिक सक्रिय भूमिका निभाने को कहा। उनके अनुसार निगरानी में कमजोरी से पूरे सहकारी क्षेत्र की साख पर असर पड़ सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रालय भारतीय रिजर्व बैंक के साथ तालमेल बढ़ा रहा है। इसका मकसद किसानों को रियायती दर पर वित्तीय मदद देना है। आधुनिक तकनीक अपनाने और जोखिम प्रबंधन मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

NCDC और डिजिटल बाजार की योजना

भूटानी ने बताया कि कार्यशाला में NCDC के साथ विशेष सत्र रखा गया है। इसमें वित्तीय सहायता और राज्यों की खास जरूरतों पर चर्चा होगी। NCDC अधिनियम में हाल के संशोधन से नए रास्ते खुले हैं।

संशोधन के बाद सहकारी विकास को बढ़ावा देने वाली गैर-सहकारी संस्थाएं भी NCDC से सहायता ले सकेंगी। भूटानी ने राज्यों से इन अवसरों का फायदा उठाने को कहा।

सहकारी उत्पादों और कृषि उपज की बिक्री के लिए साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रस्ताव है। ONDC ने इसमें सहयोग देने की पेशकश की है। आगे बढ़ने से पहले राज्यों के सुझाव लिए जाएंगे। मॉडल सहकारी बैंक की अवधारणा पर भी राज्यों की राय ली जाएगी।

PACS और पहले दिन की समीक्षा

सचिव ने PACS और जनजातीय सहकारी संस्थाओं को राज्य और राष्ट्रीय सहकारी संघों से जोड़ने पर जोर दिया। इससे उन्हें बेहतर बाजार और सदस्यों को लाभकारी दाम मिल सकेंगे। कुछ चुनी हुई सहकारी संस्थाओं के भ्रमण भी कार्यक्रम में रखे गए हैं।

उन्होंने सरकारी खरीद में लगी PACS के कमीशन, भुगतान में देरी और वित्तीय व्यवहार्यता पर जानकारी मांगी। इसी आधार पर देशभर में अपनाने लायक मॉडल बनाने की बात कही गई।

कार्यशाला के पहले दिन बहुउद्देशीय PACS, PACS का कम्प्यूटरीकरण और विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना की समीक्षा हुई। NCEL, NCOL और BBSSL के जरिए निर्यात, जैविक उत्पाद और बीज क्षेत्र की मूल्य श्रृंखला पर भी चर्चा हुई।

छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकास शील ने प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने सहकारिता क्षेत्र के विकास के लिए राज्य सरकार के पूर्ण सहयोग का भरोसा दिया।

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