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प्रधानमंत्री ने समर्पित सेवा के गुण पर जोर देते हुए संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया

The Prime Minister, Shri Narendra Modi today shared Sanskrit Subhashitam emphasising the importance of dedicated service, righteous conduct and commitment to duty: “नित्यं परिचरेच्चैव तद्वै सुकृतमुत्तमम्। कीर्तिं पुण्यं यशो लोकान्…
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स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी), भारत सरकार — प्रधान मंत्री कार्यालय · पीआईबी दिल्ली · मूल विज्ञप्ति pib.gov.in पर पढ़ें

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज समर्पित सेवा, धार्मिक आचरण और कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता के महत्व पर जोर देते हुए संस्कृत सुभाषितम साझा किया:

“नित्यं परिचरेच्चैव तद्वै सुकृतमुत्तमम्।

कीर्तिं पुण्यं यशो लोकान् प्राप्स्यसे राजसत्तम।।”

श्लोक इस बात पर जोर देता है कि दूसरों की सेवा करना और अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाना अच्छे आचरण के उच्चतम रूपों में से एक है। यह बताता है कि इस तरह का समर्पण न केवल योग्यता और सद्भावना अर्जित करता है बल्कि समाज में स्थायी सम्मान और मान्यता भी अर्जित करता है।

प्रधान मंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:

नित्यं परिचरेच्चैव तद्वै सुकृतमुत्तमम्।

कीर्तिं पुण्यं यशो लोकान् प्राप्स्यसे राजसत्तम।।

नित्यं परिचरेच्चैव तद्वै सुकृतमुत्तमम्। कीर्तिं पुण्यं यशो लोकान् प्राप्स्यसे राजसत्तम।। https://t.co/p1PFOe2E9H

-नरेंद्र मोदी (@नरेंद्रमोदी) 7 अक्टूबर 2026

यह प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति है, जिसे जारी किए गए रूप में पुन: प्रस्तुत किया गया है।

स्रोत

यह पत्र सूचना कार्यालय (PIB), भारत सरकार द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति है — Prime Minister's Office, PIB Delhi. PIB की कॉपीराइट नीति के अनुसार इसे बिना बदलाव के प्रकाशित किया गया है।

मूल विज्ञप्ति देखें
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