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मुरुगन का युवाओं से आह्वान: 2047 के विकसित भारत का नेतृत्व करें

2014-15 से 2023-24 के बीच भारत में लगभग 17.1 करोड़ नौकरियां सृजित हुईं, यह आंकड़ा मुरुगन ने रखा। उन्होंने युवाओं से कौशल, रचनात्मकता और नवाचार का उपयोग करने को कहा।
Murugan: India's youth must lead the way to Viksit Bharat by 2047
Photo: PIB

The English version of this story is being prepared. This page will switch to English by itself in a few moments.

  • युवाओं से कौशल, रचनात्मकता और नवाचार से 2047 के विकसित भारत में योगदान देने का आह्वान
  • 2014-15 से 2023-24 के बीच लगभग 17.1 करोड़ नौकरियां सृजित होने का आंकड़ा
  • एनईपी 2020 और 'वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन' पहल का जिक्र
  • AI, गेमिंग, एनीमेशन और डिजिटल सामग्री में अवसर तलाशने की सलाह
  • उपभोक्ता से आगे बढ़कर विश्व के लिए निर्माता बनने का आग्रह

केंद्रीय राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने नोएडा के एक संस्थान में छात्रों से कहा कि युवा 2047 तक के विकसित भारत के सफर में नेतृत्व करें। उन्होंने कौशल, रचनात्मकता और नवाचार का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की।

मुरुगन ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आजीवन सीखने, कौशल विकास और उद्यमिता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को उभरते अवसरों के लिए तैयार करना जरूरी है।

शिक्षा में बदलाव की जरूरत

मुरुगन ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को शिक्षा को लचीला, बहुविषयक और कौशल-आधारित बनाने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि बदलती दुनिया में सीखना जीवन भर चलना चाहिए।

उन्होंने ऑनलाइन शिक्षा की भूमिका पर भी बात की। उनके अनुसार शिक्षण के अवसर विभिन्न जरूरतों और परिस्थितियों के अनुसार सुलभ होने चाहिए, ताकि शिक्षार्थी बदलती नौकरियों के अनुरूप खुद को ढाल सकें।

सरकार की ‘वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन’ पहल को उन्होंने शोध और वैश्विक ज्ञान तक पहुंच बढ़ाने वाला अहम कदम बताया। उनके शब्दों में:

प्रतिभा हर जगह है, और अवसर भी हर जगह होने चाहिए।

नौकरियां और कौशल

मुरुगन ने रोजगार सृजन में अवसंरचना, विनिर्माण, सेवाओं, उद्यमिता और कौशल विकास की भूमिका गिनाई। उन्होंने RBI-KLEMS के आंकड़ों का हवाला दिया।

उनके अनुसार भारत में 2014-15 और 2023-24 के बीच लगभग 17.1 करोड़ नौकरियां सृजित हुईं। उन्होंने युवाओं से डिग्री से आगे बढ़कर व्यावहारिक कौशल, समस्या-समाधान की क्षमता और आत्मविश्वास विकसित करने को कहा।

तकनीक और रचनात्मक अर्थव्यवस्था

मुरुगन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, गेमिंग, एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, विस्तारित वास्तविकता (XR) और डिजिटल सामग्री जैसे क्षेत्रों में अवसर तलाशने को कहा। ये अवसर तकनीक और रचनात्मकता के मेल से बनते हैं।

उन्होंने युवाओं से तकनीक और सामग्री के उपभोक्ता बनने से आगे बढ़कर दुनिया के लिए निर्माता बनने का आह्वान किया। निरंतर सीखने और नवाचार पर जोर देते हुए उन्होंने छात्रों को उभरते उद्योगों के लिए जरूरी कौशल विकसित करने को कहा।

संविधान और जिम्मेदार नागरिकता

मुरुगन ने शिक्षा और राष्ट्र निर्माण में संवैधानिक मूल्यों के महत्व की बात कही। उन्होंने संविधान में दिए मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख किया और वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा और उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता की जरूरत बताई।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने युवाओं से लगातार सीखने, सृजन करने और दूसरों के लिए अवसर बनाने का आग्रह किया। उनके अनुसार 2047 तक विकसित भारत की प्रगति युवाओं की कौशल, नवाचार और योगदान की क्षमता पर निर्भर करेगी।

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