- केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने DST और MoST की नई वेबसाइटें शुरू कीं
- वेबसाइटों पर 22 भाषाओं में सामग्री उपलब्ध होगी
- अनुदान, फेलोशिप, योजनाओं और आवेदन की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर
- सुगम्यता के टूल्स से अक्षर, कंट्रास्ट और स्क्रीन-रीडर की सुविधा मिलेगी
- वेबसाइटें DBIM 3.0 और GIGW 3.0 मानकों के अनुरूप बनाई गई हैं
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MoST) की नई वेबसाइटों का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि ये वेबसाइटें नागरिक-केंद्रित शासन की सोच को दिखाती हैं।
मंत्री ने कहा कि इसका मकसद “जनता द्वारा विज्ञान, जनता के लिए विज्ञान” है। विज्ञान को सबके लिए सुलभ और किफायती बनाने पर जोर दिया गया।
एक ही जगह पर पूरी जानकारी
वेबसाइटों पर DST की योजनाएं, अनुदान, फेलोशिप और वैज्ञानिक कार्यक्रमों की जानकारी मिलेगी। पात्रता मानदंड, आवेदन के दिशानिर्देश, प्रस्ताव आमंत्रण, पुरस्कार और परिणाम भी यहीं होंगे।
इसका फायदा विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, स्टार्ट-अप्स, उद्यमियों, मीडिया और आम नागरिकों को होगा। नीति दस्तावेज, अधिसूचनाएं, रिपोर्ट और प्रशासनिक फॉर्म भी एक केंद्रीय भंडार में रखे गए हैं।
22 भाषाओं में और आसान पहुंच
भाषिणी के एकीकरण से वेबसाइटों पर 22 भाषाओं में सामग्री मिलेगी। इससे अलग-अलग भाषाई पृष्ठभूमि के लोगों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचेगी।
सार्वभौमिक सुगम्यता के टूल्स भी दिए गए हैं। इनसे अक्षरों का आकार, अक्षरों और पंक्तियों के बीच की दूरी बदली जा सकती है। हाई कंट्रास्ट मोड, लिंक हाइलाइट और स्क्रीन-रीडर की सुविधा भी है।
वेबसाइटें डेस्कटॉप, टैबलेट और मोबाइल पर एक जैसी पठनीयता के साथ चलेंगी।
नया ढांचा और सुरक्षा
यह पुनर्विकास मार्च 2025 में इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा DBIM 3.0 जारी होने के बाद किया गया है। DBIM मंत्रालयों की ब्रांडिंग और सामग्री प्रस्तुति के लिए साझा ढांचा देता है। GIGW 3.0 गुणवत्ता, सुगम्यता और साइबर सुरक्षा के मानक तय करता है।
वेबसाइटों पर मॉड्यूलर कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम (CMS) है, जिससे सामग्री अपडेट करना और आगे विस्तार करना आसान होगा। सुरक्षा के लिए SSL/TLS एन्क्रिप्शन और CERT-In के दिशानिर्देश लागू हैं।
कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क (CDN) से भारी ट्रैफिक के समय, जैसे योजनाओं के परिणाम और आवेदन की अंतिम तारीख पर, लोडिंग बनी रहेगी। वेबसाइटों का विकास DST, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC), परियोजना प्रबंधन दल और विकास एजेंसी ने मिलकर किया है।
कार्यक्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव उमेश वी. वाघमारे और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
