- 10 अक्टूबर को एक अमेरिकी लड़ाकू विमान ने पनामा झंडे वाले जहाज़ M/V Ocean Molica के पिछले हिस्से पर हमला किया
- यह जहाज़ Arika Sun के नाम से भी जाना जाता है
- CENTCOM के मुताबिक़ किसी क्रू मेंबर को नुकसान नहीं पहुँचा
- 14 जुलाई से नाकेबंदी फिर शुरू; 135 जहाज़ लौटाए गए
- होर्मुज़ जलडमरूमध्य से आवाजाही दो महीने से ज़्यादा के सबसे निचले स्तर पर
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ओमान की खाड़ी में एक अमेरिकी लड़ाकू विमान ने पनामा झंडे वाले जहाज़ Ocean Molica के पिछले हिस्से पर हमला किया। इससे जहाज़ का प्रोपल्शन बेकार हो गया।
क्या हुआ
CENTCOM ने कहा कि Arika Sun नाम से भी जाने जाने वाला यह जहाज़ ईरान के एक बंदरगाह से निकला था और क्षेत्रीय जलमार्ग से गुज़रने की कोशिश कर रहा था। हमले में क्रू को कोई नुकसान नहीं हुआ।
CENTCOM ने कहा कि क्रू ने "बार-बार की चेतावनियों को नज़रअंदाज़ किया और ईरान के खिलाफ जारी नौसैनिक नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश की।"
होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले जहाज़ों की संख्या दो महीने से ज़्यादा के सबसे निचले स्तर पर आ गई। यह गिरावट उस वक़्त आई जब टैंकरों पर हमले फरवरी में अमेरिका और इज़राइल के ईरान पर युद्ध शुरू करने के बाद से सबसे ज़्यादा हो गए। इस व्यवधान से शिपिंग को लेकर चिंता बढ़ी है और कच्चे तेल के दामों को सहारा मिला है।
अब तक नाकेबंदी का हाल
CENTCOM ने कहा कि उसकी सेनाओं ने 14 जुलाई को ईरानी बंदरगाहों में आने और वहाँ से जाने वाले सभी जहाज़ों के खिलाफ नाकेबंदी फिर से शुरू की।
CENTCOM के मुताबिक़ तीन महीने की सख़्त कार्रवाई में चार व्यावसायिक जहाज़ बेकार किए गए और 135 जहाज़ लौटाए गए।
तेल की आवाजाही और गुजरात की रिफाइनरी
गुजरात के वडिनार में Naraya Energy की 20 मिलियन टन सालाना क्षमता वाली तेल रिफाइनरी है, जिसे रूस की बड़ी तेल कंपनी Rosneft का समर्थन है। रिफाइनरी से जुड़ी पुरानी रिपोर्टों के अनुसार, वडिनार वह बंदरगाह है जहाँ से अंदरूनी रिफाइनरियों को जाने वाला कच्चा तेल उतरता है, जैसे Bharat Petroleum Corporation Ltd (BPCL) की बीना रिफाइनरी।
मार्च 2026 में एक ईरानी कार्गो वडिनार की ओर जा रहा था। अप्रैल में ईरान का एक बहुत बड़ा कच्चा तेल वाहक जहाज़ Derya गुजरात के तट के पास पहुँचा, जिस पर लगभग 20 लाख बैरल कच्चा तेल लदा था।
अमेरिकी छूट के तहत, डेडलाइन के बाद लदा कार्गो लेने पर खरीदारों पर अमेरिकी सेकेंडरी प्रतिबंधों का खतरा हो सकता है। इसी वजह से भारतीय रिफाइनर Derya की खेप लेने की संभावना कम थी।
भारत के लिए क्यों मायने रखता है
अप्रैल 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कच्चे तेल का लगभग 50% और ज़्यादातर LPG उन सप्लाई पर निर्भर है जो होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर आती है।
मार्च 2026 में विश्लेषकों ने कहा कि भारतीय रिफाइनरियों की लागत संरचना में तेज़ गिरावट आई है। उन्होंने कच्चे तेल की ऊँची खरीद कीमतों, बढ़ी हुई माल ढुलाई और बीमा लागत, और लंबे शिपिंग रूट की ओर इशारा किया। ये टिप्पणियाँ पूरे भारत के बारे में थीं, सिर्फ़ गुजरात के बारे में नहीं।
